
CEC Controversy Adhir Ranjan Chowdhury: देशभर में वोटर लिस्ट को लेकर पिछले कुछ दिनों से बहस तेज है। इस बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि Gen-Z यानी पहली बार वोट करने वाले युवाओं को मतदाता सूची से बाहर रखने की साजिश चल रही है। उनका दावा है कि सालाना स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) समय पर होना जरूरी है, ताकि नए पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जा सकें।
कांग्रेस लीडर अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पहली बार वोट देने वालों को अपना अधिकार इस्तेमाल करने में मदद करने के लिए रेगुलर और समय पर SSR जरूरी है। लेकिन CEC ने जनवरी 2024 से इस प्रोसेस को रोक दिया है। एक बहाना यह दिया जा रहा है कि 19 राज्यों और UTs में खतरनाक SIR चल रहा है। लेकिन इससे 16 राज्य और UTs ऐसे रह जाते हैं जहां SSR को बिना किसी वजह के रोक दिया गया है- सिवाय युवा वोटर्स को बाहर करने के। जिन राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं, वहां Gen-Z वोटर्स के वोट न दे पाने का गंभीर खतरा है। खासकर उत्तर प्रदेश और गोवा में, जहां SIR प्रोसेस बहुत पहले पूरा हो चुका है और कोई नई वोटर लिस्ट पब्लिश नहीं हो रही है। साफ है कि Gen Z जानता है कि ‘लोटस’ अब ‘लूट-अस’ बन गया है।
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि अगर SIR के दौरान छूटे मतदाता सिर्फ Form 6 भरकर दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल हो सकते हैं, तो इतनी बड़ी कवायद की जरूरत क्यों पड़ी? चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि लाखों नाम हटाए गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में अपीलें दायर करनी पड़ीं। उनका सवाल सिर्फ प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके खर्च को लेकर भी है।
उन्होंने आगे पूछा कि पहले नाम हटाने और अब छूटे मतदाताओं को फिर जोड़ने में होने वाले खर्च की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
बता दें इसी मुद्दे पर राहुल गांधी और विपक्षी दल भी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने प्रक्रियागत सवालों को अपनी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।