
J&K Politics: जम्मू कश्मीर में इन दिनों सियासी हलचल तेज है। मंगलवार को एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से भी अपना 24 साल पुराना नाता तोड़ लिया। बडगाम में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान उन्होंने यह ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
वहीं मेहदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को संबोधित अपना इस्तीफा भी सार्वजनिक किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा स्वैच्छिक है और उन्होंने यह फैसला अपनी मर्जी से लिया है। जनसभा के दौरान ही रुहुल्लाह ने इस्तीफे पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि इस्तीफे की एक कॉपी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को भी भेजी जाएगी।
पार्टी और सांसदी छोड़ने के बाद मेहदी ने सीएम उमर अब्दुल्ला और पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं किया और जनता की उम्मीदों के साथ विश्वासघात किया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी अपने चुनावी एजेंडे और जनता से किए गए वादों से पीछे हट गई है। खास तौर पर आरक्षण नीति, अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने जैसे मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व के रुख से वह नाराज थे।
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए व्यापक प्रचार किया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद वह कई अहम मुद्दों पर अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ मुखर हो गए थे।
उन्होंने लगातार आरोप लगाया कि सरकार जनता से किए गए राजनीतिक और संवैधानिक वादों को पूरा करने में विफल रही है। आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।
रुहुल्लाह मेहदी का सांसद पद और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों से इस्तीफा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की संभावना पैदा करता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उनके इस फैसले का पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।