
Artificial Intelligence(AI) को दुनिया भर में ऐसी तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, जो उत्पादकता बढ़ाने के साथ आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार दे सकती है। ग्राहक सेवा, चिकित्सा निदान, कोडिंग और कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक तुरंत नहीं पहुंचता। ऐसे में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार और आय पर पड़ने वाले असर को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित एक आर्टिकल के मुताबिक, एआई अर्थव्यवस्था में ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है, जिसे आर्थिक इतिहासकार 'एंगेल्स पॉज' कहते हैं। इसमें उत्पादकता और संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी होती है, लेकिन आम कामगारों की आय और जीवन स्तर में सुधार अपेक्षाकृत देर से दिखाई देता है।
आर्टिकल में 19वीं सदी की ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति का उदाहरण दिया गया है। इस दौरान औद्योगिक उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसका फायदा श्रमिकों की आय और जीवन स्तर में तुरंत नहीं दिखा। इससे यह संकेत मिलता है कि नई तकनीक से पैदा होने वाली आर्थिक समृद्धि को समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचने में समय लग सकता है।
पिछली औद्योगिक क्रांतियों में बड़े पैमाने पर रोजगार इसलिए भी पैदा हुए क्योंकि नई तकनीकों ने नए उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों को जन्म दिया। वस्त्र उद्योग ने फैक्ट्रियों में रोजगार बढ़ाया, ऑटोमोबाइल उद्योग ने विनिर्माण और सेवाओं में नए अवसर पैदा किए, जबकि डिजिटल क्रांति ने सॉफ्टवेयर, ई-कॉमर्स और प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया। एआई भी भविष्य में ऐसे नए रोजगार और पेशे पैदा कर सकता है, जिनकी आज कल्पना करना मुश्किल है। हालांकि, नए रोजगार बनने तक का संक्रमण काल कई कामगारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत के लिए एआई का प्रभाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है। देश ने आईटी आउटसोर्सिंग, बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट और कस्टमर सपोर्ट जैसे श्रम-प्रधान सेवा क्षेत्रों में मजबूत वैश्विक स्थिति बनाई है। लेकिन एआई के बढ़ते इस्तेमाल से बुनियादी कोडिंग, डेटा एंट्री, ग्राहक सहायता और दस्तावेजों के प्रसंस्करण जैसे कई काम कम लागत और कम समय में किए जा सकते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के कौशल और रोजगार की प्रकृति में बदलाव की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि एआई भारत के लिए केवल रोजगार संबंधी चुनौती नहीं है, बल्कि इसमें बड़े अवसर भी हैं। कृषि उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी करने, शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत में कई स्टार्टअप पहले से ही फिनटेक, भाषा तकनीक और अन्य क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।