
CBI Investigation: पुलिस की हिरासत में हुई मौत के मामले में तमिलनाडु के मदुरै में एक सत्र न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सहित चार पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 के तहत चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का आरोप तय किया है। इनमें मनमदुरई के पूर्व डीएसपी एन. शनमुगसुंदरम, तिरुप्पुवनम के पूर्व इंस्पेक्टर एसपी रमेश कुमार, पूर्व सब-इंस्पेक्टर शिवकुमार और पूर्व हेड कांस्टेबल इलैयाराजा शामिल हैं।
सीबीआई ने चारों आरोपी पुलिस अधिकारियों की रिहाई का विरोध करते हुए कहा कि जमानत देने से हिरासत में हुई मौत के संवेदनशील मामले की जांच प्रभावित हो सकती है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि इस मामले में जारी किया गया गवाह संरक्षण आदेश वर्तमान तिरुप्पुवनम इंस्पेक्टर, सेथुमणि मथावन द्वारा मनमाने ढंग से वापस ले लिया गया था। इस याचिका ने अदालत के समक्ष गवाहों की सुरक्षा और कार्यवाही जारी रहने के दौरान आरोपी को रिहा किए जाने के संभावित प्रभाव को लेकर उठाई गई चिंताओं को और बढ़ा दिया।
चारों पुलिसकर्मी इससे पहले जमानत के लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच पहुंचे थे। हाईकोर्ट ने उन्हें मदुरै के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और बांड भरने का निर्देश दिया था। हालांकि, सत्र अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार उन्होंने वहां जमानत याचिका दाखिल नहीं की।
मदपुरम भद्रकाली अम्मन मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले अजीत कुमार की जून 2025 में पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद मृत्यु हो गई थी। लापता गहनों से जुड़ी शिकायत के मामले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। इसके बाद उनकी मौत हो गई और हिरासत में हिंसा के आरोप सामने आए।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने जांच अपने हाथ में ली। एजेंसी ने पहले छह पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया गया। अब हत्या का आरोप तय होने के बाद मामला मदुरै सत्र न्यायालय में आगे चलेगा।