राष्ट्रीय

तलाक के बाद वाइफ को अब नहीं मिलेगी फूटी कौड़ी, हाई कोर्ट ने बता दी क्या होगी कंडिशन

फैमिली कोर्ट ने 7 मई, 2025 को पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण की अर्जी खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि पुरुष की शारीरिक अक्षमता निर्विवाद थी और यह सीधे तौर पर पत्नी के परिवार की वजह से हुई थी।

2 min read
Jan 24, 2026
representative picture

पति और पत्नी के विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में यदि पत्नी के कार्यों या चूक के कारण उसके पति की कमाने की क्षमता समाप्त हो जाती है, तो वह उससे भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती है। कोर्ट में एक महिला की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने होम्योपैथिक डॉक्टर पति से भरण-पोषण की मांग की थी। आरोप है कि उसके क्लिनिक में झगड़े के दौरान उसके साले और ससुर ने उस पर गोली चलाई थी।

ये भी पढ़ें

रूस ने दागे 370 ड्रोन और 21 मिसाइलें, 90% यूक्रेन अंधेरे में! क्या छिड़ेगा तीसरा विश्व युद्ध?

पत्नी की भरण-पोषण याचिका खारिज

कुशीनगर की एक पारिवारिक अदालत के उस फैसले को बरकरार रखते हुए, जिसमें पत्नी की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी गई थी। न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला ने टिप्पणी की कि ऐसे परिदृश्य में भरण-पोषण देना गंभीर अन्याय होगा, खासकर तब जब पत्नी के परिवार के आपराधिक कृत्यों से पुरुष की कमाई की क्षमता नष्ट हो गई हो।

पत्नी के भाई और पिता ने मारी गोली

आपको बता दे कि वेद प्रकाश सिंह को कथित तौर पर उनकी पत्नी के भाई और पिता ने उनके क्लिनिक में हुए झगड़े के दौरान गोली मार दी थी, जिसके कारण वह कमाने या अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो गए।

रीढ़ की हड्डी में फंसी गोली

हाई कोर्ट ने गौर किया कि पति की रीढ़ की हड्डी में एक गोली फंसी हुई है और इसे निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी से लकवा होने का खतरा बहुत अधिक है, जिससे वह आराम से बैठने या रोजगार बनाए रखने में असमर्थ हो जाएगा।

जानें फैमिली कोर्ट का फैसला

फैमिली कोर्ट ने 7 मई, 2025 को पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण की अर्जी खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि पुरुष की शारीरिक अक्षमता निर्विवाद थी और यह सीधे तौर पर पत्नी के परिवार की वजह से हुई थी।

हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

न्यायमूर्ति शुक्ला की अदालत ने टिप्पणी की, हालांकि भारतीय समाज में आम तौर पर पति से काम करने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस मामले में अनूठी परिस्थितियां सामने आईं। यह सर्वविदित है कि यद्यपि पति का कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करे, लेकिन किसी भी कोर्ट द्वारा पत्नी पर ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी कर्तव्य नहीं डाला गया है। न्यायालय ने कहा कि वर्तमान मामले के तथ्यों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि पत्नी और उसके परिवार के सदस्यों के आचरण ने विपक्षी पक्ष को अपनी आजीविका कमाने में असमर्थ बना दिया है।

...तो पत्नी को मिलेगा कोई मेंटनेंस

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि कोई पत्नी अपने कार्यों या चूक के कारण अपने पति की कमाने की अक्षमता का कारण बनती है या उसमें योगदान देती है, तो उसे ऐसी स्थिति का लाभ उठाने और भरण-पोषण का दावा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसमें आगे कहा गया है, ऐसी परिस्थितियों में भरण-पोषण देना पति के साथ घोर अन्याय होगा और अदालत रिकॉर्ड से उभर रही वास्तविकता से आंखें नहीं मूंद सकती।

ये भी पढ़ें

‘गलत नहीं हूं तो झुकूं क्यों?’ थरूर के तेवर देख कांग्रेस नेतृत्व परेशान, राहुल गांधी के साथ खींचतान की असली वजह आई सामने

Updated on:
24 Jan 2026 07:00 pm
Published on:
24 Jan 2026 06:59 pm
Also Read
View All

अगली खबर