
Andhra Allocates Crores Rs for Ancient Temples : आंध्रप्रदेश में कुंभ मेले की तर्ज पर गोदावरी पुष्करलु तीर्थ शुरू होगा। गोदावरी नदी के किनारे तीर्थयात्रा आयोजित करने के उद्देश्य से 72 करोड़ रुपये की लागत से 162 विकास कार्य शुरू किए गए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार राज्य के सैकड़ों उपेक्षित प्राचीन मंदिरों की दशा सुधारने का फैसला किया है। प्रदेश के बंदोबस्ती मंत्री ए. रामनारायण रेड्डी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में लगभग 700 उपेक्षित प्राचीन मंदिरों के विकास के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है।
जानकारी के अनुसार 26 जून से 7 जुलाई तक गोदावरी पुष्करलू में लगभग 10 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। इस आयोजन की विशालता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। गोदावरी बेसिन में पेयजल, स्वच्छता, आवास और विश्राम सुविधाओं सहित व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक बुनियादी ढांचे का विकास कार्य शुरू हो चुका है, विशेष रूप से राजामहेंद्रवरम और आसपास के क्षेत्रों में घाटों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अधिकारी त्योहार के दौरान भीड़भाड़ को रोकने के लिए एक व्यापक यातायात प्रबंधन योजना भी तैयार कर रहे हैं।
मंत्री रेड्डी ने बताया कि विभाग ने तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के आधिकारिक संरक्षक टीटीडी के सहयोग से 750 करोड़ रुपये की लागत से 5,000 'श्रीवाणी भजन मंदिर' (पूजा-अर्चना के स्थान) बनाने का लक्ष्य रखा है। रेड्डी ने बताया कि तय लक्ष्य में से 1,270 'श्रीवाणी भजन मंदिरों' के लिए 267 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ मंजूरी दी गई है।
मंत्री रेड्डी के अनुसार, राज्य भर के 6,137 मंदिरों में 'धूप-दीप-नैवेद्य' योजना (दीपक जलाना, धूप दिखाना आदि रस्में) के लिए सालाना आवंटन 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 73 करोड़ रुपये (दोगुना) कर दिया गया है।
मंत्री रेड्डी ने बताया कि दक्षिणी राज्य के 111 मंदिरों में सरकार सालाना तीन करोड़ श्रद्धालुओं को 'अन्नप्रसाद वितरण' (मुफ़्त भोजन) की सुविधा दे रही है। उन्होंने बताया, 'पिछले दो वर्षों में प्रमुख मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मंदिरों में लोगों की आस्था बढ़ी है।'
आंध्र प्रदेश में यूं तो श्रद्धा पुरा वैभव व धरोहर के लिहाज से कई प्राचीन और सुंदर मंदिर हैं, लेकिन ये मंदिर बहुत महत्वपूर्ण चर्चित माने जाते है:
चित्तूर जिले में स्थित भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित तिरुपति का यह विश्व-प्रसिद्ध तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर मंदिर राज्य का आध्यात्मिक केंद्र है और दुनिया के सबसे अमीर और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले मंदिरों में से एक है।
कुरनूल में नल्लामाला पहाड़ियों में बसा यह प्राचीन श्रीशैलम मल्लिकार्जुन मंदिर बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि यहां भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक स्थित है।
श्रीकालहस्ती स्थित प्राचीन श्रीकालहस्ती शिव मंदिर 'वायु लिंग' के लिए मशहूर है। इस शिव मंदिर को वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना और पूजा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
विशाखापत्तनम में पहाड़ी की चोटी पर बना सिंहाचलम मंदिर बहुत सुंदर है। पहाड़ शहर का नज़ारा दिखाने वाला यह शानदार मंदिर वराह लक्ष्मी नरसिम्हा को समर्पित है और अपनी बारीक पत्थर की नक्काशी के लिए जाना जाता है।
विजयवाड़ा में कृष्णा नदी के किनारे इंद्रकीलाद्री पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर भारत में सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शक्ति मंदिरों में से एक है।
कुरनूल में नल्लामाला पहाड़ियों में बना प्राचीन अहोबिलम वन मंदिर भगवान नरसिम्हा यानि भगवान विष्णु का शेर के सिर वाला अवतार को समर्पित है। यह नौ अलग-अलग मंदिरों के लिए जाना जाता है।
काकीनाडा के पास स्थित द्राक्षारामम का द्राक्षारामम मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे पांच शक्तिशाली पंचाराम क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो अपने विशाल आकार और प्राचीन ऐतिहासिक शिलालेखों के लिए जाना जाता है।