
TMC विधायकों पर अंडे फेंके गए (फोटो- लाइव लॉ एक्स पोस्ट)
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ जनता के गुस्से की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच पार्टी ने अपने सांसदों, विधायकों और नेताओं पर हुए हमलों को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर आरोप लगाया है कि राज्यभर में उसके नेताओं को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा है और हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।
सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सिर्सन्या बंदोपाध्याय ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के सामने इस मामले का उल्लेख किया। याचिका में दावा किया गया है कि पार्टी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं पर अंडे फेंके गए। इसके अलावा विधायक कुनाल घोष और मदन मित्रा को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया। पार्टी का कहना है कि इन घटनाओं से राजनीतिक हिंसा का माहौल बन रहा है और नेताओं की सुरक्षा खतरे में है।
बता दें कि, तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी पर 30 मई को सोनारपुर इलाके में अंडे फेंके गए थे। वह एक मृत पार्टी समर्थक के परिवार से मिलने पहुंचे थे, तभी नाराज भीड़ ने उनका विरोध किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना पड़ा। कुछ अंडे हेलमेट पर भी लगे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई।
6 जून की रात कमरहाटी में वरिष्ठ तृणमूल विधायक मदन मित्रा के काफिले पर भी कथित तौर पर अंडे फेंके गए। जिस गाड़ी में वह यात्रा कर रहे थे, उस पर लगातार अंडे बरसाए गए। इसी तरह तृणमूल पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को भी अदालत ले जाते समय लोगों ने अंडों से निशाना बनाया। वहीं भांगर से आए लोगों ने गिरफ्तार पूर्व विधायक सौकत मुल्ला को निशाना बनाने के लिए अंडों की पेटियां तक तैयार रखी थी, हालांकि पुलिस उन्हें दूसरे रास्ते से बाहर निकाल ले गई।
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि केवल अंडेबाजी ही नहीं, बल्कि कई इलाकों में पार्टी नेताओं के खिलाफ पत्थरबाजी और हिंसक विरोध की घटनाएं भी हुई हैं। चुनावी हार के बाद स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और कथित गलत कामों को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी ने 7 जून को होने वाली पार्षदों की बैठक भी रद्द कर दी थी क्योंकि नेताओं को एग अटैक और विरोध प्रदर्शन का डर था। अब हाईकोर्ट में दाखिल PIL के जरिए पार्टी सुरक्षा और कानूनी हस्तक्षेप की मांग कर रही है।
Updated on:
22 Jun 2026 05:14 pm
Published on:
22 Jun 2026 05:14 pm
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