राजमुंदरी में मिलावटी दूध पीने से 15 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, 7 की हालत गंभीर है और 4 की मौत हो चुकी है।
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी क्षेत्र में मिलावटी दूध के चलते पैदा हुए स्वास्थ्य संकट ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ दिनों में कई लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला गंभीर हो गया और प्रशासन ने आपात कदम उठाए। ताजा अपडेट के अनुसार 15 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 7 की हालत नाजुक बनी हुई है। बता दें कि इस मिलवटी दूध के चलते 4 लोगों की पहले ही मौत हो चुकी है।
आंध्र प्रदेश राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (AHFWD) के आयुक्त वीरपांडियन ने बताया कि भर्ती 15 मरीजों में तीन वेंटिलेटर पर, दो डायलिसिस पर और तीन वेंटिलेटर डायलिसिस सपोर्ट पर हैं। इन मरीजों में एक पांच महीने के शिशु समेत दो बच्चे भी शामिल है। गंभीर स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह पर किडनी फंक्शन सुधारने वाली विशेष दवाएं चेन्नई और मुंबई से मंगाई जा रही हैं। प्रभावित इलाकों में डॉक्टरों की 24 घंटे तैनाती की गई है, जो अगले एक महीने तक जारी रहेगी।
फूड सेफ्टी विभाग के अंतर्गत इंस्टिट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन (IPM) के निदेशक नीलकंठ रेड्डी ने बताया कि पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि दूध कूलिंग मशीन में इस्तेमाल होने वाला एथिलीन ग्लाइकोल लीक हुआ हो सकता है। प्रभावित परिवारों से दही, घी, पनीर, क्रीम और अन्य उत्पादों के करीब 10 सैंपल लेकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (FSSAI) से मान्यता प्राप्त लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। 110 परिवारों के 315 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिनमें दो में क्रिएटिनिन स्तर अधिक पाया गया, जबकि तीसरे में संदिग्ध लक्षण मिले। तीनों की हालत स्थिर बताई गई है।
पुलिस ने दूध बेंचने वाले को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और कूलिंग मशीन की मरम्मत करने वाले मैकेनिक से भी सवाल किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि दूध में यूरिया मिला होता तो तत्काल किडनी या लीवर फेलियर की स्थिति नहीं बनती, बल्कि लंबे समय तक सेवन से समस्या होती। वहीं एथिलीन ग्लाइकोल युक्त दूध पीने के तीन से चार दिन बाद गंभीर लक्षण उभर सकते हैं। बुधवार से राज्यभर में दूध व्यापारियों, निर्माताओं और स्टोरेज संचालकों के लाइसेंस और सैंपल की व्यापक जांच अभियान शुरू किया जाएगा।