
Maharashtra Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के विलय को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व गृहमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने सुनील तटकरे के बदले हुए बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब अजित पवार जीवित थे, तब तटकरे दोनों दलों के बीच विलय को लेकर किसी बैठक से इनकार क्यों कर रहे थे? अब उनकी भूमिका बदलने की वजह क्या है और उस समय उन पर किसका दबाव था?
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में देशमुख ने कहा कि अजित पवार के जीवित रहते दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के फिर से एक होने पर सहमति बन गई थी। इस संबंध में जयंत पाटील के घर बैठक हुई थी। इसके बाद बारामती में खुद अजित पवार की मौजूदगी में दोनों दलों के प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। इसमें विलय के बाद संगठन की जिम्मेदारियां और प्रदेश अध्यक्ष पद किसे दिया जाएगा, इस पर भी चर्चा हुई थी।
देशमुख ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद सुनील तटकरे लगातार ऐसी किसी बैठक के होने से इनकार करते रहे। उनका कहना था कि उस बैठक में किसी दूसरे विषय पर चर्चा हुई थी। अब तटकरे कह रहे हैं कि अजित पवार जीवित होते तो 12 फरवरी को दोनों दलों का विलय हो जाता। देशमुख ने इसी विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर तटकरे ने अपना बयान क्यों बदला? पहले उन पर किसका दबाव था?
दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के फिर से एक होने की संभावना पर देशमुख ने कहा कि शरद पवार इस मामले में अपनी भूमिका साफ कर चुके हैं। करीब 15 दिन पहले मुंबई के वाईबी चव्हाण केंद्र में हुई बैठक में उन्होंने पार्टी नेताओं को संगठन मजबूत करने के निर्देश दिए थे। फिलहाल दोनों दलों के विलय का कोई प्रस्ताव नहीं है।
देशमुख ने कहा कि दोनों दलों के एक होने की कोई चर्चा नहीं चल रही है। हालांकि अगर कोई नेता व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार गुट में शामिल होना चाहता है तो उसका स्वागत है। अच्छी छवि और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को पार्टी में मौका दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि व्यक्तिगत रूप से नेताओं के पार्टी में आने का मतलब दोनों दलों का विलय नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शरद पवार को फोन कर उनकी तबीयत का हाल जानने के सवाल पर भी देशमुख ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पवार साहब की सेहत के बारे में जानकारी ली है तो इसे सामान्य भावना के रूप में देखना चाहिए। अस्पताल जाकर किसी की तबीयत पूछना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे में इस फोन का राजनीतिक अर्थ निकालना या इसे दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय से जोड़ना ठीक नहीं है।