6 नवंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NCR के वकीलों को BS-6 नियम से छूट, कोर्ट स्टाफ को भी राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने NCR में रहने वाले वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को BS-6 नियमों से छूट दी है। अब वे अदालत के कामकाजी दिनों में गैर-BS-6 वाहनों से दिल्ली आ सकेंगे।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Mukul Kumar

•

Updated: 6 Nov 2026, 5:34 PM IST

BS-6 Rule

दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी की जांच। (फोटो- ANI)

दिल्ली-एनसीआर में बीएस-6 मानक से कम वाले वाहनों पर लगी पाबंदी के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि एनसीआर में रहने वाले वकील और न्यायिक कर्मचारी दिल्ली में अपने ऐसे वाहनों से आ-जा सकेंगे, जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं।

बार एसोसिएशन की याचिका पर दिया आदेश

हालांकि, यह छूट हर दिन लागू नहीं होगी। हाईकोर्ट ने कहा है कि वकीलों और कोर्ट स्टाफ को यह राहत केवल अदालत के कामकाजी दिनों में मिलेगी। जस्टिस अमित महाजन ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार है।

पाबंदी से वकीलों को हो रही थी परेशानी

दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए बीएस-6 मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड वाहनों के चलने पर रोक लगाई गई है। इस नियम का असर उन वकीलों पर भी पड़ रहा था, जो दिल्ली की अदालतों में प्रैक्टिस करते हैं, लेकिन उनका घर एनसीआर के दूसरे शहरों में है।

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में वकील गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद में रहते हैं। वे रोजाना दिल्ली आते हैं।

उन्हें अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचने, मुवक्किलों से मिलने और वरिष्ठ वकीलों के चैंबर में जाने के लिए अपने वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

बार एसोसिएशन का कहना था कि अगर इन वकीलों को दिल्ली आने से रोका गया तो इसका सीधा असर न्यायिक कामकाज पर पड़ेगा। कई मामलों में तय समय पर वकील के अदालत नहीं पहुंचने से मुकदमे लड़ रहे लोगों को भी नुकसान हो सकता है।

वकीलों ने कोर्ट में क्या दलील दी?

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से कहा कि वकील और न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। उनका काम जरूरी सेवाओं की तरह है और उन्हें अदालत पहुंचने से रोकने पर पूरी न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हरिहरन ने दलील दी कि सरकार के नोटिफिकेशन में कुछ खास श्रेणियों के वाहनों को छूट देने का प्रावधान पहले से मौजूद है। ऐसे में वकीलों और कोर्ट स्टाफ को भी इस दायरे में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कोविड महामारी के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें पहचान पत्र दिखाने पर वकीलों को अदालत से जुड़े काम के लिए आने-जाने की अनुमति दी गई थी।

एक वकील को एक वाहन इस्तेमाल करने की मांग

बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में छूट को सीमित और व्यवस्थित रखने का प्रस्ताव भी दिया था। इसके तहत हर पात्र वकील को केवल एक तय वाहन इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

इसके लिए वकील का पहचान पत्र, वाहन के जरूरी दस्तावेज और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की जांच करने का सुझाव दिया गया था।