
Anti Paper Leak Bill 2026:राज्यसभा में एंटी पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या राजनीतिक दल तक सीमित समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों में देश के अलग-अलग हिस्सों से विभिन्न सरकारों के दौरान कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में बड़े स्तर पर चर्चित कई बड़े पेपर लीक मामलों में 2009 का रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा पेपर लीक, 2011 का ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन, 2012 की एम्स दिल्ली प्रवेश परीक्षा, 2013 की महाराष्ट्र हायर सेकेंडरी डिग्री सर्टिफिकेट परीक्षा और 2010 की बीएड प्रवेश परीक्षा शामिल हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों की लंबी सूची बताती है कि पेपर लीक एक राष्ट्रीय समस्या रही है जिसके खिलाफ सख्त कानूनी व्यवस्था की जरूरत है।
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एंटी पेपर लीक कानून में प्रस्तावित संशोधन इस बात का प्रमाण है कि सरकार परीक्षा में पेपर लीक के मामलों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने हाल की घटनाओं के बाद तुरंत कदम उठाए और कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस विधेयक पर आने वाले रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक छात्रों के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या राजनीतिक दल की समस्या नहीं रही है। उन्होंने विभिन्न सरकारों के कार्यकाल, जिनमें यूपीए सरकार का दौर भी शामिल है के दौरान सामने आए कई चर्चित पेपर लीक मामलों का जिक्र किया। उनके इस बयान पर सदन में विपक्षी सदस्यों ने विरोध भी जताया।
विधेयक के अनुसार, पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने का अधिकार होगा। इन अदालतों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर रोजाना सुनवाई कर मुकदमे का निपटारा करने का प्रावधान किया गया है।
संशोधन के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक या अन्य अनुचित गतिविधियों में दोषी पाए जाने पर 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, संगठित गिरोहों के लिए कम से कम 7 साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का भी अधिकार मिलेगा।