
India-China Border Tension: अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव बना हुआ है। इस बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीमा प्रबंधन और सुरक्षा के लिए नई पहल कर रही है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि चीन के आधुनिक सैन्य ढांचे का मुकाबला पारंपरिक तरीकों या पुराने हथियारों से नहीं किया जा सकता। इस चुनौती से निपटने के लिए ITBP ने तीन साल की एक योजना तैयार की है। जिसके तहत LAC पर हर बॉर्डर आउटपोस्ट पर अंडरग्राउंड बंकर बनाए जाएंगे। साथ ही ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीकों का इस्तेमाल करके सीमा पर निगरानी को बेहतर किया जाएगा।
राजस्थान के अलवर में सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में हिमवीर सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध का रूप पूरी तरह बदल गया है। किसी भी युद्ध की स्थिति में जमीन के ऊपर बना कोई भी ढांचा आसानी से दुश्मन का सीधा निशाना बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए ITBP ने फैसला किया है कि अगले तीन सालों में सीमा पर मौजूद जमीन के ऊपर की चौकियों और ढांचों की संख्या के बराबर ही अंडरग्राउंड शेल्टर बनाए जाएंगे।
इस पहल के लिए पायलट प्रोजेक्ट पहले ही सभी ITBP कंपनियों में शुरू हो चुके हैं। इन अंडरग्राउंड बंकरों को आरामदायक और मजबूत डिफेंस शेल्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें वेंटिलेशन, ड्रेनेज और वॉशरूम जैसी उचित सुविधाएं होंगी, ताकि भारी गोलाबारी या आधुनिक हवाई हमलों के दौरान भी जवान जमीन के नीचे पूरी तरह सुरक्षित रहें और अपनी स्थिति पर डटे रहें।
ITBP प्रमुख ने बताया कि वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे हथियार 50 साल पुराने हैं। उन्होंने कहा कि चीनी आक्रामकता को रोकने के लिए हाई-टेक समाधान अपनाना बहुत जरूरी हो गया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान से जुड़ी स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि एक छोटा देश भी ड्रोन का इस्तेमाल करके किसी महाशक्ति को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए ITBP ने अपने 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण फंड का 70 प्रतिशत (लगभग 280 करोड़ रुपये) विशेष रूप से ड्रोन के लिए आवंटित किया है, जबकि आगामी 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की दूसरी योजना में से 1,000 करोड़ रुपये केवल ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे गए हैं।
शत्रुजीत कपूर ने बताया की ITBP की हर सीमा बटालियन में एक समर्पित ड्रोन प्लाटून तैनात की जा रही है। जवानों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है और स्वदेशी स्तर पर ड्रोन का विकास भी शुरू हो चुका है, जिससे एलएसी पर चीनी गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा सकेगी।
द हिंदू की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सर्कल में माजा कंपनी ऑपरेटिंग बेस के पास असाफिला इलाके में जुलाई के आखिर से भारत और चीन के बीच फेस-ऑफ की स्थिति बनी हुई है। जुलाई में नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच थोड़ी झड़प हुई थी। इसके कुछ ही समय बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) बड़ी संख्या में वापस लौटी और ऊंचे पहाड़ी इलाके में तंबू गाड़ दिए। यह जगह उस सीमा रेखा के 6 से 7 किलोमीटर अंदर है, जिसे भारत अपनी सीमा का हिस्सा मानता है।
हालांकि, तब से कॉर्प्स कमांडर और राजनयिक स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है। भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने सीमा पर अपनी तैनाती काफी बढ़ा दी है। इस गतिरोध में ITBP की नई बनी शौर्य कमांडो यूनिट ने बेहतरीन भूमिका निभाई है, अब इस यूनिट का विस्तार करके इसे एक पूरी बटालियन का रूप दिया जा रहा है, जिसे ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लड़ने वाली एक विशेष फोर्स के तौर पर तैयार किया जा रहा है।