
India China Trade Deficit: सीमा पर भारतीय जवान चीनी सैनिकों से आमने-सामने हैं, लेकिन दिल्ली में सत्ता का शिविर पूरी तरह चुप है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आज X पर इस चुप्पी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने आईटीबीपी महानिदेशक की तारीफ को आधार बनाते हुए पूछा कि जब सीमा पर टकराव जारी है, तो प्रधानमंत्री और उनकी टीम क्यों बोल नहीं रही। रमेश का यह पोस्ट सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के तमाम सवालों को एक साथ उठाता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को अपने X अकाउंट पर एक तीखा पोस्ट लिखकर केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवालों का अंबार लगा दिया। उन्होंने कहा कि जब आईटीबीपी के महानिदेशक अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ हालिया आमने-सामने की मुठभेड़ों में बल के प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप क्यों है।
रमेश ने स्पष्ट किया कि ताकसिंग क्षेत्र में टकराव के बाद पिछले महीने वचा और दमाई में कॉर्प्स कमांडर स्तर की बातचीत हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार लद्दाख की तरह यहां भी गश्ती बिंदु फिर से हाथ से निकल गए हैं। चीन लगातार अरुणाचल के भारतीय शहरों के नाम बदल रहा है और 60,000 मेगावाट क्षमता वाला विशाल बांध बना रहा है, जो भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
आर्थिक मोर्चे पर रमेश ने और भी गंभीर आंकड़े दिए। उन्होंने बताया कि 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल 99 अरब डॉलर था। इससे एमएसएमई क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ बनकर रह गया है। यह घाटा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।
रमेश ने 19 जून 2020 की उस घटना का भी जिक्र किया जब गलवान घाटी में 20 जवानों के बलिदान के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि न कोई हमारी सीमा में घुसा है और न ही कोई पोस्ट कब्जे में है। सेवानिवृत्त सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने भी बताया था कि लद्दाख में घुसपैठ के समय उन्हें सिर्फ यही निर्देश मिला था‘जो उचित समझो वो करो’।
इसके अलावा, 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की पाकिस्तान को गहन सैन्य मदद का खुलासा किया था। लेकिन 25 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने उस खुलासे का खंडन कर दिया और उसके तुरंत बाद आरएसएस-बीजेपी विचारधारा से जुड़े थिंक टैंक का नेतृत्व संभाल लिया।