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चुनाव आयोग पर असदुद्दीन ओवैसी का प्रहार, बोले- मैंने कहा था कि SIR असल में बैकडोर NRC है, अब सच साबित हो रहा

Asaduddin Owaisi: SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अहम सवालों के जवाब देने में नाकाम रहा है। ओवैसी ने बताया कि उन्होंने पहले ही संसद में कहा था कि SIR असल में पिछले दरवाजे से लाया गया NRC है।
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Asaduddin Owaisi
असदुद्दीन ओवैसी (Photo - Video Screenshot from ANI)

Asaduddin Owaisi on ECI SIR Row: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ECI के कामकाज पर कई सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों, फॉर्म-6 में अतिरिक्त घोषणा, ECINET, BLO और SIR के तहत वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। ओवैसी ने बताया कि उन्होंने पहले ही संसद में कहा थी कि SIR असल में पिछले दरवाजे से NRC लागू करने जैसा है।

ओवैसी ने पूछा- जब 14 बार आपत्ति दर्ज कराई गई, तो फैसले सर्वसम्मत कैसे?

ओवैसी ने पूछा कि आयोग यह दावा कैसे कर सकता है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, जबकि दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीने की अवधि में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग के भीतर ही आयुक्तों को अंधेरे में रखा जा रहा है, तो देश को क्या संदेश जा रहा है?

फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर ओवैसी ने कहा कि कई पूर्व चुनाव आयुक्तों ने साफ तौर पर कहा है कि आयोग के पास फॉर्म-6 में मनमाने बदलाव करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसे बदलावों के लिए कानूनी संशोधनों की जरूरत होती है।

2:1 के अनुपात से CEC चुनेंगे, तो साख पर सवाल उठना तय: ओवैसी

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा, "जब 2023-24 में संसद में यह बिल पेश किया गया था, तो मैंने सदन में तर्क दिया था कि अगर सरकार अपनी मर्जी से चुनाव आयुक्तों को चुनती है, तो जनता की नजर में संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता हमेशा शक के घेरे में रहेगी। आपने चयन समिति में प्रधानमंत्री, कानून मंत्री और विपक्ष के नेता को शामिल किया, जिससे शुरू से ही 2:1 का अनुपात बन गया। आज वही चिंता सच साबित हो रही है।"

SIR को बताया बैकडोर NRC

वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म-6 से जुड़े नए नियमों पर ओवैसी ने कहा, "पूरे देश में SIR प्रक्रिया के कारण लगभग 10 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं। अब, अगर परिवार के किसी बुजुर्ग सदस्य या पिता का नाम लिस्ट में नहीं है, तो उस परिवार का 18 साल का युवा पहली बार वोटर बनने के लिए फॉर्म-6 कैसे भरेगा, जब उस पर माता-पिता के घोषणा पत्र की शर्त लगा दी गई है? यही वजह है कि मैंने संसद में कहा था कि यह बैकडोर NRC है।"

घर-घर BLO भेजना नामुमकिन: ओवैसी

चुनाव आयोग के प्रेस नोट में कहा गया है कि BLOs दस्तावेज इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाएंगे, जिसे ओवैसी ने अव्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि हैदराबाद और तेलंगाना में जमीनी स्तर पर देखे गए हालात के आधार पर BLOs को सिर्फ नोटिस बांटने में ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब आयोग का दावा है कि दिल्ली में, BLOs उन 40 लाख लोगों के घर जाएंगे जिन्हें नोटिस मिले थे, ताकि उनके दस्तावेज इकट्ठा करके अपलोड किए जा सकें। यह इंसानी तौर पर नामुमकिन है। बुनियादी सवालों का जवाब देने के बजाय, आयोग बड़े-बड़े बयानों की आड़ लेने की कोशिश कर रहा है।

Updated on:
26 Sept 2026 09:44 pm
Published on:
26 Sept 2026 09:44 pm
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