
सूरत। दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं की तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए नए सिविल अस्पताल लाया गया। दांत में तेज दर्द की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल भेजा, जहां दंत रोग विशेषज्ञों ने जांच की और एक्स-रे सहित जरूरी परीक्षण किए। इस दौरान अस्पताल परिसर में पुलिस का कड़ा पहरा रहा।
नारायण साईं को लाजपोर जेल से पुलिस सुरक्षा के बीच सीधे अस्पताल के दंत विभाग में ले जाया गया। उसके साथ जेल पुलिस का काफिला और स्थानीय पुलिस के जवान भी मौजूद रहे। पुलिस की मौजूदगी के चलते कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में हलचल रही। दंत विभाग के डॉक्टरों ने उसके दांतों और जबड़े की जांच की। एक्स-रे सहित अन्य परीक्षण भी कराए गए। इलाज पूरा होने के बाद उसे फिर से कड़ी सुरक्षा में लाजपोर जेल ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
जेल में रहने के दौरान नारायण साईं पहले भी कई बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की शिकायत कर चुका है। जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, उसे कमर दर्द और हड्डियों में दर्द की समस्या भी रही है। इसके अलावा वह अक्सर दांत और जबड़े में दर्द की शिकायत करता है। जेल में प्राथमिक उपचार के बाद जरूरत पड़ने पर उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराने के लिए सिविल अस्पताल लाया जाता है।
सूरत की एक अदालत ने नारायण साईं को उसकी एक पूर्व महिला अनुयायी की ओर से दर्ज कराए गए दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उसके सहयोगियों धर्मिष्ठा उर्फ गंगा, भावना उर्फ यमुना और पवन उर्फ हनुमान को 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। उल्लेखनीय है कि नारायण साईं के पिता आसाराम भी दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे हैं।
नियमों के अनुसार समय-समय पर उसे स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। इससे पहले अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के बेटे नारायण साईं को बड़ा झटका देते हुए 2013 के दुष्कर्म मामले में उसकी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया था। 4 मई को गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साईं की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार नजर नहीं आता कि आवेदक की बरी होने की संभावना हो।