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असम-अरुणाचल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, झड़प के बाद CM हिमंत ने की शांति की अपील

Assam Arunachal Pradesh Tension: असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर आर्थिक नाकेबंदी के दौरान दोनों पक्षों में झड़प से तनाव बढ़ गया। भूमि अतिक्रमण और सीमा विवाद को लेकर शुरू हुई नाकेबंदी के बीच पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दोनों राज्यों के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
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Aug 13, 2026
Assam Arunachal Pradesh border clash
असम सीएम हिमंत बिस्व सरमा (Photo-IANS)

Assam Arunachal Pradesh Border Dispute: असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर गुरुवार को एक बार फिर तनाव बढ़ गया। दरअसल, धेमाजी जिले में आर्थिक नाकेबंदी को लेकर प्रदर्शन कर रहे असम के लोगों और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के बीच झड़प की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अरुणाचल प्रदेश पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। यह विवाद अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ जारी अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी के दूसरे दिन सामने आया। 

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नाकेबंदी के दौरान कुछ लोगों ने असम के प्रदर्शनकारियों पर पथराव किया, जिसमें कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।

हिमंत बिस्वा सरमा ने की शांति की अपील

झड़प की खबरों के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने दोनों राज्यों के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। एक्स पर पोस्ट करते हुए सीएम सरमा ने कहा- मैं असम और अरुणाचल के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करता हूं। सीमाएं हमारे राज्यों को परिभाषित कर सकती हैं, लेकिन हमारे दिलों को कभी अलग नहीं कर सकतीं।

क्यों शुरू हुई आर्थिक नाकेबंदी?

दरअसल, छात्र संगठन तकम मिसिंग पोरीन केबांग (TMPK) ने बुधवार से अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू की थी। संगठन का आरोप है कि जमीन पर अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर हुई कथित गोलीबारी में असम के 12 मूलनिवासी लोग घायल हुए थे।

TMPK के साथ मिसिंग मिमाग केबांग (MMK) और तकम मिसिंग महिला केबांग (TMMK) जैसे स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी नाकेबंदी का समर्थन किया है। प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल प्रदेश आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं और स्कूली वाहनों को इससे छूट दी गई है।

संगठनों की प्रमुख मांगों में असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद का जल्द समाधान, कथित गोलीबारी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और असम की जमीन पर कथित अतिक्रमण को समाप्त करना शामिल है।

1987 से चला आ रहा है सीमा विवाद

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा विवाद 1987 से चला आ रहा है। इसी वर्ष अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। इसके बाद केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों के बीच सीमा से जुड़े विवादों के समाधान के लिए एक त्रिपक्षीय समिति का गठन किया था। समिति ने कुछ क्षेत्रों को असम से अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी।

विवाद को सुलझाने की दिशा में 2022 में अहम पहल हुई थी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नामसाई घोषणा (Namsai Declaration) पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य 123 विवादित गांवों के मुद्दे को क्षेत्रीय समितियों के जरिए कम करके एक सीमित संख्या तक लाना था।

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अब केवल 52 गांवों से जुड़े मुद्दे बाकी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य सरकारें इसी भावना के साथ बातचीत जारी रखेंगी और सीमा विवाद को पूरी तरह सुलझाने का प्रयास करेंगी।

Updated on:
13 Aug 2026 01:59 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:59 pm