Assam Assembly Election: असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा की नाराजगी ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 32 साल पुराने संबंध तोड़ने और इस्तीफे की पेशकश को चुनाव से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है।
Assam Assembly Election: असम में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इससे पहले सत्तारूढ़ खेमा और विपक्ष दोनों में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में समझौता तो हो चुका है, लेकिन अंतिम रूप अभी बाकी है।
असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा की नाराजगी ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 32 साल पुराने संबंध तोड़ने और इस्तीफे की पेशकश को चुनाव से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन के सबसे बड़े पैरोकार थे।
अब नए प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के सामने चुनौती है कि वे क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल को मजबूत रखें और पार्टी की गिरती पकड़ को संभालें।
कांग्रेस जिन प्रमुख क्षेत्रीय दलों के साथ समझौता चाहती है, उनमें Raijor Dal और Asom Jatiya Parishad (AJP) शामिल हैं। दोनों दल नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी आंदोलन के बाद बने थे। इनके अलावा वाम दल और पहाड़ी क्षेत्र के दल भी संभावित सहयोगी हैं।
2021 चुनाव में ये दोनों दल तीसरे मोर्चे के रूप में लड़े थे, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ था। हालांकि केवल एक सीट जीती, जहां राइजोर दल के नेता अखिल गोगोई विधायक बने, लेकिन कई सीटों पर इनके वोट भाजपा की जीत के अंतर से ज्यादा थे। इसी अनुभव के बाद कांग्रेस ने एआईयूडीएफ से दूरी बनाकर इन क्षेत्रीय दलों से नजदीकी बढ़ानी शुरू की।
| पार्टी | जीती हुई सीटें |
|---|---|
| Bharatiya Janata Party (BJP) | 60 |
| Indian National Congress (INC) | 29 |
| Asom Gana Parishad (AGP) | 9 |
| All India United Democratic Front (AIUDF) | 16 |
| United People's Party Liberal (UPPL) | 6 |
| Bodoland People's Front (BPF) | 4 |
| Communist Party of India (Marxist) (CPI-M) | 1 |
| Raijor Dal | 1 |
| अन्य/निर्दलीय | 0 |
बता दें कि असम में 126 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से कांग्रेस 100 सीटों पर लड़ना चाहती है। रायजोर दल ने 15 सीटों की मांग रखी है। वहीं, AJP ने पहले 40 सीटें मांगीं, बाद में 20 तक आने की बात कही है।
एजेपी का कहना है कि राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए उसे पर्याप्त सीटों पर लड़ना जरूरी है, लेकिन “भाजपा को हराना” प्राथमिक लक्ष्य है।
सत्ता पक्ष में भी सब कुछ सहज नहीं है। भाजपा की पुरानी सहयोगी असम गण परिषद (AGP) का राजनीतिक दायरा घटा है और सीट बंटवारा अभी तय नहीं हुआ।
बता दें कि 2016 में AGP ने 24 सीटों पर चुनाव लड़ा और 14 जीती थीं। 2021 में एनडीए के समझौते के तहत भाजपा ने 93, AGP ने 25 और UPPL ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा। AGP ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के हालिया बयान से तनाव और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि AGP स्वतंत्र पार्टी है और जहां चाहे उम्मीदवार उतार सकती है, लेकिन भाजपा कहां लड़ेगी यह भाजपा तय करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि डेरगांव सीट, जहां AGP के विधायक हैं, पर बीजेपी खुद उम्मीदवार उतार सकती है और मैत्रीपूर्ण मुकाबला भी संभव है।