
असम विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस ने खुलकर अपनी हार को स्वीकार किया है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने साफ कहा है कि वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
उन्होंने खुद इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए असम के लोगों का आभार भी जताया, जिन्होंने उन्हें वोट और समर्थन दिया। गोगोई ने यह भी कहा कि चुनावी नतीजे उनके लिए एक बड़ा संदेश हैं।
गोगोई ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत को भी खास तौर पर सराहा। उन्होंने कहा कि हजारों कार्यकर्ताओं ने कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम किया। उनकी लगन और संघर्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने माना कि नतीजे भले ही उम्मीद के मुताबिक नहीं आए, लेकिन कार्यकर्ताओं की मेहनत पार्टी की ताकत बनी रहेगी।
इस बीच, गोगोई ने यह भी ऐलान किया है कि वह जल्द ही एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे। इस अभियान का मकसद लोगों से सीधे जुड़ना होगा और यह समझना कि आखिर कहां कमी रह गई। गोगोई ने यह भी कहा कि कांग्रेस जनता से सुझाव लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करेगी, ताकि भविष्य में बेहतर तरीके से राज्य की सेवा की जा सके।
गोगोई ने साफ किया कि पार्टी विपक्ष की भूमिका मजबूती से निभाएगी। उन्होंने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस चुप बैठने वाली नहीं है। विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह जनता के मुद्दों को उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार किसी भी तरह का अन्याय या दबाव बनाने की कोशिश करेगी, तो वह उसके खिलाफ मजबूती सेखड़े रहेंगे।
इस बीच गोगोई ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में चुनावों की निष्पक्षता पर खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव कराने वाली संस्थाओं की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि असम एक ऐसा उदाहरण बन रहा है, जहां से एक खास राजनीतिक मॉडल पूरे देश में लागू करने की कोशिश हो रही है।
गोगोई ने बीजेपी की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि सत्ताधारी पार्टी 'एक देश, एक पार्टी, एक नेता' की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी बिना संस्थाओं पर पकड़ बनाए या कानूनों को मोड़े बिना चुनाव नहीं जीत सकती।