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NDA की हैट्रिक: असम की हरियाली पर फिर चढ़ा भगवा रंग, चाय बागानों से पहले ही आने लगी थी जीत की महक

Assam Election Results: चाय बागान की महिलाओं ने एक सुर में कहा था, जो हमारा ख्याल रखेगा, वोट उसी को देंगे।
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May 05, 2026
Assam Election Results
असम की हरियाली पर तीसरी बार चढ़ा भगवा रंग (इमेज सोर्स: ANI)

NDA Victory Assam: असम के चाय बागानों में इस जीत की महक पहले ही आने लगी थी। तिनसुकिया, जोरहाट, डिब्रूगढ़ इलाके में चाय बागानों से जुड़े हजारों परिवारों ने फिर चायवाले पर ऐतबार किया। चाय बागान की महिलाओं ने एक सुर में कहा था, जो हमारा ख्याल रखेगा, वोट उसी को देंगे। किसी का नाम लिए बिना भी उनका इशारा साफ था। तीसरी बार भाजपा की प्याली में जीत की चाय इन्होंने चुन-चुनकर डाल ली। परिसीमन और महिला वोटर्स के लिए योजनाओं ने जीत को आसान बनाया और असम की हरियाली पर तीसरी बार भगवा रंग चढ़ा।

मुख्यमंत्री का इलाका अंगद का पांव

मैं जब कामाख्या माता के दर्शन को पहुंचा तो मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की जुबान पर भाजपा की जीत की आरतियां थी। कामाख्या मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा की विधानसभा जालुकबारी का इलाका है। ब्रह्मपुत्र नदी पर नौ पुल बनाने के बाद सीएम सरमा ने चुनाव में विकास की यह तस्वीर दिखाई और अपने गढ़ की चारों सीटों पर भाजपा का परचम लहरा दिया। इनमें सेंट्रल गुवाहाटी, न्यू गुवाहटी, जालुकबारी और दिसपुर शामिल हैं। भाजपा ने कांगे्रस के 10 नेताओं को चुनाव से पहले भाजपा का दुपट्टा पहनाकर टिकट दिया था, इसमें सबसे चर्चित दिसपुर से प्रद्युत बोरदोलोई रहे। बारदोलाई ने आसानी से अपनी सीट निकाल ली।

मारवाड़ी फॉर्मूल से युवा तुर्क फेल

गुवाहाटी सेंट्रल से असम गण परिषद की युवा प्रत्याशी कुनकी चौधरी के सामने भाजपा के विजयकुमार गुप्ता थे। माहौल इस तरह बनाया गया कि इस बार युवा पीढ़ी माहौल बदलेगी, लेकिन यहां परिसीमन में जुड़े मारवाडिय़ों ने भाजपा को बेजोड़ जीत दिलाई। कुनकी 38 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतराल से हारी है।

विपक्ष के बिखरने का फायदा मिला

पिछले चुनाव में निचले असम के मुस्लिम बाहुल्य इलाके की धुबरी, बारपेटा ओर गोलपाड़ा इलाके की सीटों में कांग्रेस और एयूआइडीएफ का दबदबाथा। इस बार भाजपा की कूटनीति से दोनों को अलग होना पड़ा, जिससे दोनों ही चारों खाने चित्त हो गई। बदरूद्दीन अजमल और कांग्रेस दोनों ही पूरे इलाके में कमजोर हुए, भाजपा को इसका फायदा मिला।

अब मुख्यमंत्री का चेहरा कौन?

मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने पूरे चुनाव को खुद पर केंद्रित कर लिया। जीत के बाद अब हैट्रिक का तोहफा सरमा को मिल सकता है और यदि बदलाव की राजनीति की नाराजगी रही तो चेहरा बदलने से भी इनकार नहीं है। हालांकि कांग्रेस के दस जनप्रतिनिधियों को भाजपा में शामिल करवाकर टिकट देने के उनके फैसले पर संघ की नाराजगी उनके पक्ष में नहीं है।

केरल में राहुल-प्रियंका हिट, असम में हुए विफल

केरल में कांग्रेस को जीत दिलाने में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी का बड़ा हाथ रहा, लेकिन असम में दांव नहीं चला। प्रियंका को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाना भी कांग्रेस के काम नहीं आया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी केरल में बड़ी संख्या में सभाएं व रोड शो किए। इसके अलावा के.सी.वेणुगोपाल, शशि थरूर जैसे नेताओं के बीच दूरियां मिटाई और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा। चुनाव से पहले किसी भी नेता को पार्टी का चेहरा घोषित नहीं किया गया। इसके चलते केरल में कांग्रेस की दस साल बाद सत्ता में वापसी हो रही है।

असम: लगा ही नहीं जीत के लिए लड़ रही कांग्रेस

असम में चुनाव के दौरान कभी नहीं लगा कि कांग्रेस यहां जीतने के लिए चुनाव लड़ रही है। भले ही प्रियंका गांधी को कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन असम में भीतरघात, स्थानीय नेताओं की बगावत, प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच दूरी के चलते उन्होंने ज्यादा रुचि नहीं ली। इसका असर प्रचार में भी दिखा, जहां राहुल-प्रियंका ने कम रैलियां की।

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