
जदयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (फोटो- Lalan Singh FB)
Lalan Singh on Congress Protest: कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए देश भर में विरोध प्रदर्शन किए। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर पूरे देश में बेवजह हंगामा खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना और उन पर हमला करना कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है। कांग्रेस को बहाने बनाने और नकारात्मक विरोध प्रदर्शन करने के बजाय अपनी लगातार हो रही चुनावी हार के असली कारणों की समीक्षा करनी चाहिए।
ललन सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी चुनावी हार के कारणों की निष्पक्ष समीक्षा करने में विफल रही है। उनकी हार का सबसे बड़ा कारण पार्टी की नकारात्मक सोच है। कांग्रेस के नेता जिस नकारात्मक मानसिकता के साथ राजनीति कर रहे हैं, उसी वजह से जनता उन्हें बार-बार नकार रही है।
ललन सिंह ने कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस को यह नजर नहीं आता। उनका एजेंडा अब केवल अख़बार की रिपोर्ट के आधार पर नकारात्मक विरोध प्रदर्शन करने तक ही सीमित रह गया है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर ललन सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसकी निष्पक्ष चुनाव कराने की क्षमता को दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जिस SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उस पर देश की सर्वोच्च अदालत भी अपनी मुहर लगा चुकी है। सही वोटर लिस्ट बनाए रखना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, फिर भी कांग्रेस सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए संस्थाओं पर सवाल उठाती है।
SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए ललन सिंह ने पूछा कि दुनिया का कौन सा देश विदेशी नागरिकों को वोट देने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बस यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है कि विदेशी नागरिकों या उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल न हों जो देश के वैध नागरिक नहीं हैं। कांग्रेस ने पहले भी इस मुद्दे का विरोध किया था, लेकिन उसे हर जगह करारी हार का सामना करना पड़ा था।
ललन सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ न तो कोई ठोस मुद्दा है और न ही विकास की कोई वैकल्पिक नीति, इसलिए वे संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
Updated on:
25 Sept 2026 04:12 pm
Published on:
25 Sept 2026 04:12 pm
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