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Assam Floods 2026: 82 जिंदगियां लील गई तबाही, 1.78 लाख जिंदगियां बेघर

Assam Flood News: असम में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन पीछे छोड़ जा रहा है खौफनाक बर्बादी का मंजर। 82 लोगों की मौत के बाद अब भी पौने दो लाख लोग बेघर हैं, वहीं ब्रह्मपुत्र नदी हर साल राज्य की जमीन को निगल रही है। इस बीच ग्रामीणों की जांबाजी और बॉलीवुड से मिले मदद के हाथों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है।
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Assam Floods 2026
Assam Floods 2026 : असम बाढ़: 82 लोगों की मौत, 1.78 लाख अब भी प्रभावित (फोटो सोर्स:@sreejayaa24)

Assam Flood Death Toll: पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत राज्य असम इस समय प्रकृति के सबसे विकराल रूप से जूझ रहा है। भले ही नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन बाढ़ का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। अब तक इस विनाशकारी त्रासदी में 82 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि सात जिलों के 1.78 लाख से अधिक लोग बेघर होकर राहत शिविरों में दिन गुजारने को मजबूर हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, चराईदेव, शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, बजाली, धेमाजी और शोणितपुर के लगभग 349 गांव पूरी तरह जलमग्न हैं।

सब्सिडी और आर्थिक मदद के तौर पर केंद्र सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से ₹379.35 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। हालांकि, जलप्रलय के कारण 15,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि डूब चुकी है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

Assam Floods 2026: मुख्य आंकड़े

सूचकआंकड़ा
कुल मृतक82
प्रभावित आबादी~1.78 लाख
प्रभावित जिले7 (सबसे प्रभावित: चराईदेव)
जलमग्न कृषि भूमि15,060 हेक्टेयर
केंद्र द्वारा राहत राशि₹379.35 करोड़

Assam Floods 2026: 'जज्बे को सलाम': जब मिसाल बनी शिवसागर के ग्रामीणों की जांबाजी

जहां एक तरफ कुदरत का कहर था, वहीं दूसरी तरफ इंसानियत का अटूट जज्बा देखने को मिला। शिवसागर जिले के नेपाली खूंटी इलाके में जब 19 जुलाई की रात अचानक पानी बढ़ा, तो लोग छतों, ऊंचे मचानों और पेड़ों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। ऐसे वक्त में स्थानीय ग्रामीणों ने बिना अपनी जान की परवाह किए, 6 देशी नावों के सहारे पूरी रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और 5 गांवों के 1,000 से अधिक लोगों की जान बचाई।

"चारों तरफ पानी था, भूखे-प्यासे ग्रामीणों ने पूरी रात सिर्फ दूसरों की सांसें बचाने के लिए नाव चलाई। यह इंसानी हिम्मत की सबसे बड़ी मिसाल है।" एक स्थानीय निवासी

ब्रह्मपुत्र के कटान का 'साइंटिफिक इलाज': IIT-गुवाहाटी संभालेगा कमान

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित इलाकों का दौरा करते हुए यह स्पष्ट किया कि बाढ़ से भी बड़ी समस्या ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा किया जाने वाला नदी तटीय कटाव (River Bank Erosion) है। डिब्रूगढ़ के चाबुआ, बलिजान और राहमोरिया जैसे अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने बड़ा ऐलान किया:

IIT-गुवाहाटी की मदद: राज्य सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव को रोकने के लिए आईआईटी-गुवाहाटी के विशेषज्ञों को शामिल करेगी।

90 करोड़ का प्रोजेक्ट: आधुनिक तकनीक का उपयोग कर तटबंधों को मजबूत किया जाएगा।

3 अगस्त से मुआवजा: प्रभावित परिवारों को 3 अगस्त से सीधे वित्तीय सहायता मिलनी शुरू होगी।

स्कूल व नामघर जीर्णोद्धार: 10 अगस्त को स्कूल खुलने से पहले और क्षतिग्रस्त नामघरों (वैष्णव प्रार्थना केंद्रों) का पुनर्निर्माण प्राथमिकता पर किया जाएगा।

बॉलीवुड और सामाजिक संगठनों ने थामी असम की बांह

इस मुश्किल दौर में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरा देश असम के साथ खड़ा है।

रणदीप हुड्डा की पहल: बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने ग्लोबल सिख्स (Global Sikhs) संस्था के साथ मिलकर शिवसागर के बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री बांटी और लंगर सेवा की। उन्होंने आगाह किया कि बाढ़ के बाद जमा हुआ कीचड़ महामारी फैला सकता है, इसलिए पूरे देश को आगे आकर मदद करनी चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): LJP (R) ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 10 दिनों तक रोजाना 15,000 लोगों को भोजन कराने और मुफ्त मेडिकल कैंप लगाने की योजना है।

कृषि पुनर्वास: कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने चराईदेव में कम्युनिटी पैडी नर्सरी और पौधों के वितरण का शुभारंभ किया है ताकि किसान समय पर दोबारा खेती शुरू कर सकें।

पूर्वोत्तर का स्थायी नासूर: क्यों हर साल डूबता है असम?

असम में हर साल आने वाली बाढ़ सिर्फ अत्यधिक बारिश का नतीजा नहीं है। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो तिब्बत से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी जब असम के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, तो अपने साथ भारी मात्रा में गाद (Silt) लाती है। गाद जमा होने से नदी की गहराई कम हो जाती है और थोड़ा सा भी अतिरिक्त पानी तबाही का कारण बन जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पूर्वोत्तर राज्यों में जल प्रबंधन, आधुनिक ड्रेजिंग (Dredging) और पड़ोसी देशों (जैसे भूटान और चीन) के साथ वास्तविक समय का जल डेटा साझाकरण मजबूत नहीं होता, तब तक असम को इस वार्षिक आपदा से पूरी तरह निजात मिलना मुश्किल है।

Updated on:
02 Aug 2026 09:15 pm
Published on:
02 Aug 2026 09:15 pm