अटल बिहार वाजपेयी ने कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान की परमाणु युद्ध की धमकी वाले बयान पर अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से ऐसी बात कही थी कि क्लिंटन सन्न रह गए थे। इसके बाद नवाज शरीफ भागे-भागे अमेरिका पहुंचे थे।
अटल की शांति की कोशिशों को पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने धक्का दिया। तीन जंग लड़ चुका पाकिस्तान इस बार दबे पांव कारगिल की चोटियों पर बैठा हुआ था। मैत्री बस यात्रा और लाहौर समझौता पत्र के मुद्दे अब जंग की शोर में दब गए थे।
पाकिस्तान की नॉर्दन लाइन इंफ्रेंट्री के सैनिक द्रास, कारगिल और LoC के हिस्सों पर घुसपैठ कर चुके थे। भारत ने अपनी जमीन वापस लेने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। भारतीय सेना का ऑपरेशन विजय और वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर शुरू हो चुका था। बोफोर्स की तोप के गोलें पहाड़ों के दरख्त उड़ा रहे थे। पूरी दुनिया की नजह इस सैन्य झड़प पर थी।
अमेरिका अपनी चौधराहट दिखाने के लिए आतुर था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत और पाकिस्तान पर जंग रोकने का दबाव बना रहे थे। क्लिंटन ने अपनी आत्मकथा में माय लाइफ में कारगिल युद्ध और भारत के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी संग बातचीत का जिक्र किया है।
दरअसल, बोफोर्स की तोपों और भारतीय सेना के युवा अधिकारी अद्मय साहस का परिचय दे रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों के पास पीछे हटने के अलावा कोई चारा नहीं था। पाकिस्तान ने खुद को हारता देख परमाणु बम की गीदड़ भभकी देनी शुरू कर दी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार अलर्ट पर रखे हैं।
इससे वाशिंगटन में बैठे क्लिंटन के माथे पर शिकन की लकीरें आ गईं। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बात की, जो परमाणु हमले के डर का हवाला देकर युद्ध रोकने की गुहार लगा रहे थे। इसके बाद क्लिंटन ने भारत पर दबाव डालने की कोशिश की और वाजपेयी जी से संपर्क किया। कुछ रिपोर्ट्स में आधी रात के फोन कॉल का जिक्र है, तो कुछ में गोपनीय पत्र का।
अटल बिहारी ने पाकिस्तान की गीदड़ भभकी पर क्लिंटन की बात का जवाब देते हुए कहा, 'मिस्टर क्लिंटन, मैं आपको बता दूं कि मैं अपनी आधी आबादी खोने को तैयार हूं, लेकिन पाकिस्तान कल सुबह का सूरज नहीं देख पाएगा। वाजपेयी ने स्पष्ट कर दिया कि भारत LOC पार नहीं करेगा, लेकिन घुसपैठियों को हर हाल में निकालेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने फौरन पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को वाशिंगटन बुलाया। नवाज भागे-भागे अमेरिका पहुंचे। 4 जुलाई 1999 को शरीफ ने क्लिंटन से मुलाकात की और वापसी की घोषणा की। 26 जुलाई को भारत ने कारिगल विजय की घोषणा की।