
Badrinath Donation Controversy: किसी एक कर्मचारी की कथित हरकत के आधार पर पूरी समिति की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर सवाल उठाना उचित नहीं है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के वित्त नियंत्रक हेम कंडपाल ने ANI से विशेष बातचीत में बंद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति हमेशा कानूनी प्रावधानों और लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करती है। किसी एक व्यक्ति की गलती को पूरी समिति से जोड़ना न्यायसंगत नहीं होगा।
उन्होंने साफ तौर पर कहा, 'यह मामला व्यक्ति विशेष से जुड़ा हुआ है। इसे BKTC की मानक कार्यप्रणाली से जोड़ना गलत होगा। यह 1939 के अधिनियम के तहत संचालित होती है। वर्षों से स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करती है। किसी व्यक्ति की गलती को पूरी समिति पर थोपना उचित नहीं होगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर में चढ़ावा चोरी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है। इस संबंध में जल्द ही जानकारी शेयर की जाएगी। एक कमेटी गठित की जा चुकी है। पुलिस ने शुरुआती जांच शुरू कर दी है। मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कर ली गई है। यह अपराध गो-हत्या या माता-पिता की हत्या के समान है, जिसे किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष कार्यालय में निजी सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मंदिर के चढ़ावे के कथित अवैध गबन के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल प्रकरण में प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया है। उनके खिलाफ बद्रीनाथ पुलिस थाने में BNS 2023 की धारा 306 और धारा 316(5) के तहत दर्ज की गई है। उन पर दर्ज शिकायत में आरोप है कि प्रमोद नौटियाल ने व्यक्तिगत लाभ के लिए मंदिर चढ़ावा राशि का अवैध रूप से दुरुपयोग किया है।
आपको बता दें कि मामले की गंभीरता और शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है। यह जांच समिति पूरे प्रकरण की व्यापक जांच करेगी।