
Excess LPG in India (फोटो सोर्स- X)
LPG- भारत में खाना पकाने वाली गैस LPG का जरूरत से ज्यादा स्टॉक हो गया है। हाल ये है कि ईंधन बेचने वाली कंपनियों को इसे स्टोरेज करना भारी पड़ रहा है। फारस की खाड़ी में सप्लाई में रुकावट की आशंका को देखते हुए कंपनियों ने पहले ही ज़्यादा स्टॉक मंगा लिया और संभावित कमी को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन में भी काफ़ी बढ़ोतरी हो गई। ऐसे में अब कंपनियों के पास LPG का स्टॉक ज़रूरत से ज़्यादा हो गया है। तीन सरकारी रिफाइनरियों ने हर दिन 40000 टन तक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई बुक की थी। हालांकि अब रोज़ाना इंपोर्ट की ज़रूरत 30000 से 32000 टन के आसपास ही है।
पिछले कुछ महीनों में गैस की कमी को देखते हुए सरकारी प्रोसेसर्स द्वारा खासा प्रोडक्शन बढ़ाया गया। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के लगभग पूरी तरह बंद होने से शिपमेंट पर असर पड़ने के बाद उन्होंने अपना आउटपुट दो-तिहाई से ज़्यादा बढ़ाकर लगभग 54000 टन प्रतिदिन कर दिया था। अब रोज़ाना प्रोडक्शन को घटाकर करीब 40000 टन कर दिया गया है।
भारत का 90 प्रतिशत से ज़्यादा LPG मध्यपूर्व से आयात होती है। ईरान में युद्ध के कारण सप्लाई रुकने से देश को इसकी भारी कमी का सामना करना पड़ा था। इस कमी के कारण बायोमास और केरोसिन जैसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन के इस्तेमाल जैसे अस्थायी उपाय करने पड़े। सरकार ने नेचुरल गैस पाइपलाइन बिछाने के काम को तेज़ी से पूरा करने के लिए आपातकालीन नियम भी लागू किए।
गैस की डिमांड में धीरे धीरे सुधार आया। खासकर बड़े कंज्यूमर्स जैसे रेस्टोरेंट या सिरेमिक-टाइल बनाने वाली इंडस्ट्रीज़ ने सप्लाई संकट के दौरान पाइप्ड गैस जैसे दूसरे फ्यूल अपना लिए।
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि युद्ध के चरम पर रिफाइनरियों ने अपनी ज़रूरत से ज़्यादा माल खरीदा क्योंकि उन्हें डर था कि इनमें से कुछ शिपमेंट की डिलीवरी नहीं हो पाएगी। अब सारा ईंधन देश में पहुंच रहा है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते से कुछ हफ़्तों के लिए जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से सप्लाई फिर से शुरू हो गई थी। अब दोबारा चालू हुए संघर्ष से रुकावटें फिर से शुरू हो गई हैं लेकिन भारत में अभी तक इनका असर महसूस नहीं हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार बड़े ग्राहकों की तरफ़ से मांग में तेज़ी से सुधार नहीं हुआ था। कुकिंग गैस सप्लाई में रुकावटों से निपटने के लिए भारत की ज़बरदस्त कोशिशों-जब कार्गो फारस की खाड़ी में फंसे हुए थे-के कारण सरकारी फ्यूल रिटेलर्स के सामने एक उलटी समस्या खड़ी हो गई है: उनके पास ज़रूरत से ज़्यादा स्टॉक जमा हो गया है। पिछले कुछ महीनों में इस स्थिति के कारण कुछ कंपनियों को स्टोरेज की समस्या और पेनल्टी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि एक सरकारी रिफाइनरी को जहाज के मालिक को जुर्माना तक देना पड़ा। स्टोरेज टैंक भरे होने के कारण उसके LPG कार्गो को उतारने में देरी हुई थी जिसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में भारत के तेल मंत्रालय, इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प के प्रवक्ताओं ने टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
Updated on:
10 Jul 2026 08:41 am
Published on:
10 Jul 2026 08:40 am
