
बिहार के बांकीपुर विधान सभा उपचुनाव में प्रत्याशी बदल कर भाजपा ने जन सुराज को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए भी यह फैसला सकारात्मक नहीं रहा। अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को टिकट दिए जाने का एक मात्र आधार नवीन से उनकी करीबी बताया जाता है। बताया जाता है कि भाजपा अध्यक्ष ने अपने स्तर पर अभिषेक का नाम सीधे तय कर लिया था। उनका नाम पार्टी दफ्तर में विचार के लिए आए संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट में भी नहीं था। उनके बैकग्राउंड तक की जांच नहीं की गई थी।
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के बाद बिहार में यह पहला चुनाव हो रहा है। पहले ही चुनाव में वह पक्षपात और करीबी को फायदा पहुंचाने के आरोप से घिर गए।
बांकीपुर सीट भाजपा का गढ़ रही है। खुद नवीन यहां से विधायक थे। उनसे पहले उनके पिता हुआ करते थे। ऐसे में नितिन नवीन इसे अपनी सीट मान कर 'अपने उम्मीदवार' अभिषेक को विधान सभा पहुंचाना चाहते थे। लेकिन, उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। यह उनके लिए आगे मनमाना फैसला नहीं लेने का संदेश भी है।
नितिन नवीन ने अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बना कर यह संदेश देने की भी कोशिश की थी कि प्रशांत किशोर के मैदान में होने के बावजूद भाजपा चुनाव को एक औपचारिकता मान रही है, गंभीरता से नहीं ले रही है। लेकिन, उम्मीदवार बदले जाने के बाद जन सुराज ने इस नरेटिव की हवा निकाल दी। उसने कहना शुरू किया कि प्रशांत किशोर के डर से भाजपा ने अपना उम्मीदवार ही बदल दिया। हालांकि, भाजपा का नया उम्मीदवार नीरज सिन्हा भी कोई दिग्गज नेता नहीं है।
कहा जा रहा है कि अभिषेक के पिता चारा घोटाले में आरोपी थे, इसलिए भाजपा नेताओं को लगा कि प्रशांत किशोर इसे मुद्दा बना कर बांकीपुर में भाजपा की जीत की संभावनाओं को कमजोर कर सकते हैं। इस वजह से उम्मीदवार बदला गया। लेकिन, इस बात में दम नहीं लगता। खुद आरोपी चुनाव लड़ते रहे हैं तो पिता पर लगे आरोप की वजह से उम्मीदवार बदलने का फैसला हैरान करने वाला लगता है।
राजनीतिक गलियारों में दबी जुबान से असल वजह कुछ और ही बताई जा रही है। एक तो उम्मीदवार को मनमाना तरीके से चुने जाने के चलते नेताओं में असंतोष था। उस पर अभिषेक के व्यक्तित्व से जुड़े कुछ आरोप सामने आ गए। इसके बाद असंतुष्ट भाजपा नेताओं को मौका मिला। उन्होंने अपनी बात भाजपा नेतृत्व तक पहुंचाई और नेतृत्व ने भी उम्मीदवार बदले जाने की जरूरत समझी।
कई भाजपा नेताओं का मानना है कि पक्षपातपूर्ण तरीके से उम्मीदवार चुना जाना भी चुनाव में एक मुद्दा बन सकता था। प्रशांत किशोर जिस तरह भाई-भतीजावाद, पक्षपात, जाति आदि के विरोध में बात करके चुनावी नरेटिव बना रहे हैं, उसमें भाजपा को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ सकता था।
भाजपा के उम्मीदवार बदलने से जन सुराज को फिलहाल नैतिक बल जरूर मिला है। पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से उम्मीदवार प्रशांत किशोर इस मुद्दे को जरूर भुनाएंगे। हो सकता है प्रचार के आखिरी दौर में जन सुराज अभिषेक कुमार को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश करे।
बांकीपुर विधान सभा सीट पर 1995 से बीजेपी का ही कब्जा रहा है। 2008 से पहले यह सीट पटना पश्चिम हुआ करती थी। 2006 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की मृत्यु के बाद उनके बेटे नितिन नवीन यहां से विधायक बने। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दिया था।
पटना पश्चिम/बांकीपुर से कब कौन रहा विधायक, यहां देखिए:
| वर्ष (Year) | नाम (Name) | दल / पार्टी (Party) |
| 1957 | रामशरण साव | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1962 | कृष्ण बल्लभ सहाय | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1967 | महामाया प्रसाद सिन्हा | जन क्रांति दल |
| 1969 | ए. के. सेन | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1972 | सुनील मुखर्जी | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1977 | ठाकुर प्रसाद | जनता पार्टी |
| 1980 | रंजीत सिन्हा | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1985 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1990 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1995 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2000 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2006 से | नितिन नवीन | भारतीय जनता पार्टी |