Bengal Politics: ममता बनर्जी शुरू से ही राजनीति में काफी सक्रिय रहीं। हालांकि बंगाल में बहुत कम उम्र में उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिया जिसके बाद चारों तरफ उनकी चर्चा होने लगी।
Bengal Politics: बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीतिक पार्टियों की तैयारी तेज हो गई है। ममता बनर्जी के किले को भेदने के लिए बीजेपी ने भी सियासी दांव पेच शुरू कर दिए हैं। बंगाल में लेफ्ट को सत्ता से बेदखल करने के बाद लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीता है। बनर्जी इस बार चुनाव जीतकर चौथी बार सत्ता पर काबिज होना चाहेंगी, लेकिन अबकी बार बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती हुई नजर आ रही है।
ममता बनर्जी शुरू से ही राजनीति में काफी सक्रिय रहीं। हालांकि बंगाल में बहुत कम उम्र में उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिया जिसके बाद चारों तरफ उनकी चर्चा होने लगी। कोलकाता के जोगमाया देवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कांग्रेस (आई) के स्टूडेंट विंग छात्र परिषद की स्थापना की थी। जब ममता बनर्जी छात्र राजनीति कर रही थीं, उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
1974 में ही इंदिरा गांधी के खिलाफ समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान कर दिया। यह आंदोलन पटना से शुरू हुआ और बाद में पूरे देश में फैल गया।
इसी आंदोलन के सिलसिले में जेपी कोलकाता विश्वविद्यालय आए थे। जेपी का विरोध करते हुए ममता बनर्जी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ को हटाते हुए उनकी गाड़ी के बोनट पर चढ़ गई। उन्होंने जमकर नारेबाजी की। कहा जाता है कि इस दौरान ममता बनर्जी ने बोनट पर डांस भी किया था। फिर क्या था, अगले दिन अखबारों में ममता बनर्जी की तस्वीरें छपने लगीं और देश के बड़े नेताओं का अपनी तरफ ध्यान खींचा। ममता ने छात्र जीवन में राजनीति कभी नहीं छोड़ी।
जेपी आंदोलन के कारण 1977 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी। इस सरकार में मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाया गया। जब मोरारजी देसाई कोलकाता आए तो कांग्रेस ने उन्हें काले झंडे दिखाने का प्लान बनाया।
इसका जिम्मा ममता बनर्जी को दिया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रास्ता बदलकर और बदले लिबास में प्रधानमंत्री देसाई की कार के सामने ममता बनर्जी चली गईं। उनके हाथ में काला झंडा था। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी की और झंडा लहराना शुरू कर दिया। इसके बाद कई और कांग्रेस कार्यकर्ता भी सामने आ गए। इसके बाद एक बार फिर प्रदेश में ममता बनर्जी की चर्चा होने लगी।
1990 में ममता बनर्जी कांग्रेस की युवा नेता थी। खाद्य तेल में मिलावट के चलते प्रदेश में सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे थे। ममता बनर्जी ने भी कई रैलियां की। लेकिन जब ममता हाजरा में रैली के लिए जा रही थीं तब CPI कार्यकर्ता ने उनपर धारदार हथियार से हमला कर दिया और उनका सिर फोड़ दिया। हमला इतना खतरनाक था कि ममता बनर्जी की जान पर बात बन गई थी।