Security Cover : टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी पर बड़ा हमला बोलते हुए उनसे अपनी केंद्रीय सुरक्षा छोड़ने की चुनौती दी है। बनर्जी ने बीजेपी के साथ 'अंदरूनी डील' का आरोप लगाते हुए बंगाल चुनाव में सियासी पारा चढ़ा दिया है।
Challenge: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राष्ट्र के नाम संबोधन दे रहे थे,ठीक उसी समय बंगाल की सियासत में तूफान आ गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी पर बहुत तीखा हमला बोला है। अभिषेक ने सीधे तौर पर अधीर रंजन को चुनौती दी है कि अगर वह सच में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, तो उन्हें तुरंत अपना 'सेंट्रल सिक्योरिटी कवर' (केंद्रीय सुरक्षा) छोड़ देना चाहिए। अभिषेक बनर्जी का यह आक्रामक बयान उस समय आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और हर दल एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश कर रहा है।
अभिषेक बनर्जी ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीधे सवाल दागा, "What is the deal?" (आखिर डील क्या है?)। उनका सीधा इशारा इस बात की ओर था कि जो नेता दिन-रात केंद्र सरकार और बीजेपी की आलोचना करते हैं, उन्हें आखिर गृह मंत्रालय की ओर से इतनी भारी सुरक्षा क्यों दी जा रही है। अभिषेक ने जनता से अपील की कि वे इस 'दोहरे चरित्र' को समझें। उनका साफ आरोप था कि कांग्रेस नेता अंदरखाने बीजेपी के साथ मिल कर टीएमसी को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं, और इसी वफादारी के इनाम के रूप में उन्हें केंद्रीय बलों की सुरक्षा मिली हुई है।
इस तीखे बयान के बाद कांग्रेस खेमे में भारी हलचल मच गई है। कांग्रेस नेताओं और अधीर रंजन चौधरी के समर्थकों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी नेता की सुरक्षा का आकलन गृह मंत्रालय की खुफिया एजेंसियों के खतरे को देखते हुए किया जाता है, न कि राजनीतिक सौदेबाजी से किया जाता है। कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी अपनी खिसकती जमीन देखकर बौखला गई है, इसीलिए वे इस तरह के बेबुनियाद और स्तरहीन आरोप लगा रहे हैं।
इस घटना के बाद बंगाल चुनाव में सुरक्षा और 'गुप्त समझौतों' का मुद्दा एक बड़ा चुनावी हथियार बन गया है। ऐसा माना जा रहा है कि टीएमसी अब अपनी आने वाली हर रैली में इस 'क्या है डील?' वाले मुद्दे को जनता के बीच आक्रामक तरीके से उठाएगी। वहीं, चुनाव आयोग की नजर भी राजनीतिक दलों के इस तरह के तीखे बयानों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अधीर रंजन चौधरी इस चुनौती का कोई सीधा जवाब देते हैं, अपनी सुरक्षा छोड़ते हैं, या फिर इस मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।
इस पूरी राजनीतिक बहस का एक बड़ा पहलू यह भी है कि बंगाल में विपक्षी 'इंडिया गठबंधन' का व्यावहारिक रूप में कोई वजूद नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भले ही टीएमसी और कांग्रेस एक साथ खड़े होने का दावा करते हों, लेकिन बंगाल के स्थानीय समीकरणों में दोनों कट्टर राजनीतिक दुश्मन हैं। अभिषेक बनर्जी का यह बयान इसी दुश्मनी को और गहरा करता है। टीएमसी की स्पष्ट रणनीति है कि वह कांग्रेस को बंगाल में 'बीजेपी की बी-टीम' साबित कर दे, ताकि राज्य का अल्पसंख्यक और सत्ता-विरोधी वोट बिना बंटे पूरी तरह से टीएमसी के पक्ष में आ जाए। (इनपुट: ANI)