
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो डिजाइन : पत्रिका)
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee: लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। यह बिल पास न हो पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं, लेकिन उनके इस संबोधन से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में जनता के सामने केवल "झूठ का एक और जाल" पेश करेंगे।
एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इंडिया ब्लॉक ने इस बिल का विरोध महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ होने के कारण नहीं, बल्कि परिसीमन प्रक्रिया के कारण किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना चाहती है, ताकि वह राजनीतिक लाभ उठा सके। मुख्यमंत्री ने कहा, "यह विधेयक देश और गैर-बीजेपी राज्यों को बांटने की एक सोची-समझी साजिश थी। बीजेपी जानती है कि वह 543 सीटों पर पूर्ण बहुमत नहीं ला सकती, इसीलिए यह सीटों को बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है।"
गौरतलब है कि यह 131वां संशोधन विधेयक 2029 के आम चुनावों से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए लाया गया था। लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मतदान किया। सदन में हुई जोरदार बहस के बाद जब वोटिंग हुई, तो विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया। दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह बिल लोकसभा में गिर गया। ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने अपने सभी 21 सांसदों को इस बिल के विरोध में वोट करने के लिए खास तौर पर दिल्ली भेजा था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वह न तो बंगाल को और न ही देश को बंटने देंगी। उनका मानना है कि मोदी सरकार का पतन इसी बिल के गिरने के साथ शुरू हो गया है।
ममता बनर्जी के अलावा टीएमसी के वरिष्ठ नेता ब्रात्या बसु ने भी प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाए। बसु ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल एकतरफा संवाद करते हैं और उन्होंने पिछले 15 सालों में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। उनका तर्क था कि बिना किसी सवाल-जवाब के दिया जाने वाला ऐसा भाषण लोकतांत्रिक नजरिये से पूरी तरह बेकार है। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह रस्साकशी अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे में तब्दील हो गई है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में विपक्ष के इन तीखे आरोपों का क्या और कैसे जवाब देते हैं।
विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि परिसीमन से दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व संसद में घट जाएगा। वहीं, बीजेपी नेताओं ने इसे विपक्ष की "महिला विरोधी मानसिकता" करार देते हुए कहा है कि वे जानबूझकर महिलाओं को उनके हक से दूर रख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रात 8:30 बजे होने वाले संबोधन पर अब पूरे देश की नजर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी बिल गिरने का ठीकरा विपक्ष पर किस तरह फोड़ते हैं और 2029 के चुनावों के लिए क्या नया रोडमैप देश के सामने रखते हैं।
भले ही 131वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका, लेकिन 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (मूल महिला आरक्षण कानून) अभी भी पूरी तरह से लागू है। हालांकि, इसका असली कार्यान्वयन भविष्य में होने वाली नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से ही जुड़ा हुआ है, जो अब और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है। (इनपुट : ANI)
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Updated on:
18 Apr 2026 07:38 pm
Published on:
18 Apr 2026 07:37 pm
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