
पश्चिम बंगाल में वोटर्स की लिस्ट से नाम हटने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। लाखों लोगों के नाम कट गए हैं और कई सीटों पर चुनाव का नतीजा मुश्किल से कुछ सौ वोटों से तय हुआ था।
एक सीट पर 365 वोटों से हार हुई, वहां 7800 नाम कटे। दूसरी जगह 469 का अंतर था। मुर्शिदाबाद जिले में तो लाखों नाम गायब हो गए। वकीलों ने कोर्ट में साफ कहा कि इससे एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची व वी मोहना शामिल हैं, उन्होंने इसको लेकर चुनाव आयोग से साफ आंकड़े मांगे हैं।
अदालत अब यह जानना चाहती है कि अपील ट्रिब्यूनल में कितनी अपीलें अभी लंबित हैं, इनमें कितनी निपटाई जा चुकी हैं, कितने नाम हटाने वालों ने अपील की हैं और कितने नाम जोड़ने का विरोध करने वालों ने अपील की हैं।
साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि मंजूर अपीलों के बाद वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि यह पूरा प्रोसेस 2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले खत्म हो जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने चुनाव आयोग के वकील से कहा कि अपीलें जल्दी निपटाने के लिए क्या सुझाव और बदलाव किए जा रहे हैं, वो भी बताएं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करीब 38 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें से सिर्फ 7 लाख उन लोगों की हैं जिनके नाम कट गए। बाकी 31 लाख अपीलें नाम जोड़ने का विरोध करने वालों या आयोग की तरफ से हैं।
कोर्ट ने जोर दिया कि नाम कटे लोगों की अपीलों को पहले प्राथमिकता दी जाए। 95 फीसदी मामलों में नाम वापस जुड़ जाते हैं। नगरपालिका चुनाव आने वाले हैं, फिर पंचायत चुनाव, फिर 2029 का लोकसभा चुनाव। अगर नाम समय पर नहीं जुड़े तो ये लोग वोट नहीं डाल पाएंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि नगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। नाम नहीं जुड़े तो वोट नहीं पड़ेंगे। चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि हम इस बात से सहमत हैं कि चुनाव से पहले, खासकर संसदीय चुनाव से काफी पहले सब निपट जाना चाहिए।
इस बीच, गोपाल शंकरनारायणन ने भी कहा कि जो लोग दूसरों को वोटिंग अधिकार से वंचित करना चाहते हैं, उनकी अपीलें ट्रिब्यूनल पर बोझ न बनें। नाम कटे लोगों को प्राथमिकता मिले।
इस पर चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने आश्वासन दिया कि ट्रिब्यूनल के साथ बैठकें चल रही हैं। पोर्टल की कुछ दिक्कतें हैं। अगले हफ्ते तक स्ट्रीमलाइन करने के सुझाव कोर्ट के सामने रखे जाएंगे।
कोर्ट ने कहा कि अपीलों के फैसले के बाद वोटर लिस्ट अपडेट करने के कदमों की जानकारी भी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि नाम जुड़ने वालों की सप्लीमेंटरी लिस्ट जल्दी जारी हो, ताकि आगामी चुनावों में उनका हक सुरक्षित रहे।