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बंगाल चुनाव पर SC में बड़ा खुलासा: TMC का दावा, ‘वोटर लिस्ट से नाम हटाकर बदले गए चुनाव नतीजे’

Special Intensive Revision West Bengal: तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में SIR के तहत हटाए गए लाखों मतदाताओं के नामों ने चुनाव नतीजों को प्रभावित किया है। 31 सीटों में जीत का अंतर हटाए गए वोटरों से कम था और 35 लाख अपीलें अभी लंबित हैं।

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May 11, 2026
TMC Voter Deletion Claims West Bengal Election (AI Image)

TMC Voter Deletion Claims West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम हटाने के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुए और कुछ सीटों पर जीत का अंतर प्रभावित हुआ है।

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चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया पर क्या कहा?

चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर एसआईआर अभियान चलाया। इस अभियान के तहत वोटर लिस्ट को अपडेट किया गया। इसके दौरान मृत, दूसरी जगह जा चुके, डुप्लीकेट और अपात्र लोगों के नाम हटाए गए और नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 90 लाख नाम हटाए गए।

TMC का आरोप है कि इसमें से 27 लाख से अधिक नाम तार्किक विसंगतियों के नाम पर बिना ठोस कानूनी आधार के हटा दिए गए। पार्टी का कहना है कि इसी वजह से बंगाल चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा है।

TMC ने लगाए गंभीर आरोप

TMC की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि कम से कम 31 विधानसभा सीटों में जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम SIR के दौरान हटा दिए गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक टीएमसी उम्मीदवार केवल 862 वोटों से हारा, जबकि उस क्षेत्र में 5,000 से अधिक नाम हटाए गए थे। बनर्जी ने कहा कि इसका चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे राज्य में TMC और BJP के बीच वोट अंतर लगभग 32 लाख वोटों का है, जबकि 35 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं, जो मतदाता हटाने के खिलाफ दाखिल की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमल्या बगची शामिल थे, ने कहा कि यदि हार का अंतर हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम है तो प्रभावित पक्ष उचित आवेदन दाखिल कर सकते हैं।

इस निर्णय को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि संकीर्ण जीत वाले चुनाव और मतदाता हटाने से जुड़े मामले न्यायिक समीक्षा के योग्य हो सकते हैं।

अपील और प्रक्रिया में देरी

TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपील प्रणाली में देरी की चिंता जताई। उनका कहना था कि वर्तमान गति से अपीलीय न्यायाधिकरणों को पेंडिंग मामलों को निपटाने में लगभग चार साल लग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि वर्तमान प्रणाली को मजबूत करना और प्रक्रियात्मक सुधार करना आवश्यक है, ताकि न्याय समय पर मिल सके।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने कहा कि कानूनी स्थिति स्पष्ट है। आयोग ने दोहराया कि चुनाव से जुड़े विवादों में उचित उपाय चुनाव याचिका दायर करना है।

TMC का यह दावा पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों और मतदाता सूची के संशोधन प्रक्रिया में एक बड़ा विवाद पैदा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है और प्रभावित पक्षों को उचित आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी है।

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