
Donald Trump(Image-ANI)
Diplomacy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगभग एक दशक के अंतराल के बाद चीन की एक बहुत अहम और ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे हैं। इस हफ्ते उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति का करीब 10 बरसों में यह पहला चीन दौरा है। इससे पहले साल 2017 में ट्रंप ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन की यात्रा की थी, लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में हो रहा यह दौरा पहले से बहुत अलग और बहुत तनावपूर्ण माहौल में हो रहा है। इस समय पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका-चीन के बीच जारी 'ट्रेड वॉर' (व्यापार युद्ध) और वाशिंगटन की ओर से शुरू किए गए 'ईरान युद्ध' पर टिकी हुई हैं।
पिछले साल ट्रंप प्रशासन की ओर से आक्रामक तरीके से शुरू की गई ट्रेड वॉर के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर 145 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया था। इसके जवाब में चीन ने अपना आर्थिक दबदबा दिखाते हुए 'रेयर अर्थ' (दुर्लभ खनिजों) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीन के इस कदम से अमेरिका की कई फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह ठप पड़ गया था, जिसने ट्रंप प्रशासन को चीन की असली आर्थिक ताकत का एहसास कराया। हालांकि, बीते अक्टूबर में दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक अस्थायी संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, लेकिन इस दौरे में ट्रंप के लिए व्यापारिक और टैरिफ से जुड़े मसलों को सुलझाना एक बड़ी चुनौती होगी।
इस शिखर सम्मेलन में एक और सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे प्रत्यक्ष युद्ध के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। चीन, ईरान के तेल का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि बीजिंग इस युद्ध को शांत करने में अपनी कूटनीतिक भूमिका निभाए। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चीन से कूटनीति के जरिए मदद करने का आग्रह किया है। वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप अपनी इस यात्रा के दौरान चीन की ओर से ईरान से की जा रही लगातार ऊर्जा खरीद का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे।
तनाव का एक और बड़ा कारण हाल ही में अमेरिका की ओर से कई चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन चीनी कंपनियों ने ईरान की सेना को सैटेलाइट फोटो और ऐसा कच्चा माल मुहैया कराया, जिसका इस्तेमाल मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना पर हमले करने और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल व ड्रोन कार्यक्रमों में किया गया।
दूसरी ओर, चीन ने इन अमेरिकी प्रतिबंधों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में इन प्रतिबंधों को 'अवैध और एकतरफा' करार दिया। उन्होंने साफ किया कि चीनी कंपनियां हमेशा कानूनों और नियमों के तहत व्यापार करती हैं और चीन उनके वैध अधिकारों की पूरी रक्षा करेगा। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि प्राथमिकता युद्ध रोकने की होनी चाहिए, न कि युद्ध की आड़ में अन्य देशों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से बदनाम करने की।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के अलावा अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी बड़े बदलाव हो रहे हैं। इस दौरे के बीच यह खबर भी है कि अमेरिकी सीनेट द्वारा जल्द ही केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने की उम्मीद है। बहरहाल, ट्रंप का यह चीन दौरा कूटनीतिक रूप से एक 'बारूदी सुरंग' से गुजरने जैसा है। क्या यह मुलाकात ईरान युद्ध को शांत कर पाएगी या ट्रेड वॉर की नई चिंगारी भड़काएगी, यह देखना पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
Published on:
11 May 2026 06:26 pm
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