
Bengaluru Family Massacre : बेंगलुरु। कर्नाटक के बेंगलुरु में पत्नी समेत ससुराल के सात लोगों की हत्या के मामले में एक और चौंकाने खुलासा हुआ है। आरोपी इंदुशेखर अपने 10 साल के भांजे को उसी कार में लेकर घूमता रहा, जिसमें उसके माता-पिता के शव बोरियों में भरे हुए थे। मासूम को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके माता-पिता की हत्या हो चुकी है और कार में रखी बोरियों में उन्हीं के शव हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बच्चे को कुछ समय तक इसलिए जिंदा रखा, ताकि वह रिश्तेदारों के फोन आने पर उनसे बात कर सके और परिवार के लोगों के जिंदा होने का भ्रम बना रहे।
आरोप है कि इंदुशेखर ने बाद में बच्चे की भी हत्या करने की योजना बना रखी थी, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी बच्चे को लेकर बेंगलुरु लौट रहा था, तभी पुलिस ने हलासुरु इलाके में उसकी कार रोककर हिरासत में ले लिया। इस मामले में आरोपी की नाबालिग बेटी की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस उसे हत्याकांड में दूसरा आरोपी मानकर जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, 10 वर्षीय बच्चा शंकर और नलिनी का बेटा है। दोनों की हत्या आरोपी ने परिवार के अन्य सदस्यों के बाद की थी। आरोप है कि इंदुशेखर ने बच्चे को अपने साथ कार में बैठाया और उसमें रखी बोरियों के बारे में उसे बताया कि उनमें कचरा और बेकार सामान भरा है।सफर के दौरान कार से बदबू आने पर बच्चे ने मामा से सवाल भी किया, लेकिन आरोपी ने उसे गुमराह कर दिया। इसके बाद आरोपी ने बच्चे के सोने के दौरान शिराड़ी घाट इलाके में शवों को ठिकाने लगा दिया और फिर उसे लेकर बेंगलुरु लौट आया।
इस बीच, परिवार के सदस्यों के लापता होने की शिकायत श्रीरामपुरा पुलिस थाने में दर्ज हो चुकी थी। पुलिस गायब लोगों के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। जांच में सामने आया कि सभी मोबाइल फोन बार-बार एक ही लोकेशन दिखा रहे थे। यह लोकेशन आरोपी के मोबाइल फोन की लोकेशन से भी मेल खा रही थी।
पुलिस आरोपी के वापस लौटने का इंतजार कर रही थी। जैसे ही वह बच्चे के साथ हलासुरु इलाके में पहुंचा, पुलिस ने उसकी कार को रोक लिया। कार से तेज दुर्गंध आ रही थी। तलाशी के दौरान पुलिस को पीड़ितों के मोबाइल फोन भी एक साथ रखे हुए मिले। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने सात लोगों की हत्या करने की बात कबूल की।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने 10 साल के भांजे को घर लौटने के बाद मारने की योजना बनाई थी। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति की हत्या करने का भी प्लान था। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के चलते वह अपनी अगली योजना को अंजाम नहीं दे सका। पुलिस के अनुसार, इंदुशेखर ने सबसे पहले अपनी पत्नी सुनीता (40) की हत्या की। इसके बाद उसने सास रूपावती (65) को निशाना बनाया। फिर साले शिवकुमार (30), उसकी पत्नी दिव्या और सात वर्षीय बेटे पुनीत की हत्या कर दी। आरोपी के अंतिम शिकार उसका दूसरा साला शंकर (40) और उसकी पत्नी नलिनी बने। हालांकि, उनका 10 वर्षीय बेटा इस हत्याकांड में बच गया। पुलिस के मुताबिक, इसी बच्चे को आरोपी ने शवों से भरी कार में अपने साथ सफर कराया था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने शवों को पैक करने और ठिकाने लगाने के लिए करीब 15 प्लास्टिक की बोरियां खरीदी थीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पीड़ितों पर उस समय हमला किया, जब वे बैठे हुए थे या सो रहे थे। आरोप है कि उसने ग्राइंडिंग स्टोन (पीसने वाले पत्थर) से उनके सिर पर वार किए। इससे वे बेहोश हो जाते थे। इसके बाद आरोपी ने उनकी मौत सुनिश्चित करने के लिए दोबारा हमला किया।
पुलिस के मुताबिक, हर हत्या के बाद आरोपी ग्राइंडिंग स्टोन और घर को केमिकल से साफ करता था, ताकि खून के निशान मिटाए जा सकें। शुरुआती जांच में घर में खून के निशान तलाशना मुश्किल हुआ, लेकिन आधुनिक उपकरणों की मदद से की गई फॉरेंसिक जांच में घर के कई हिस्सों में खून के छींटे मिले। इनमें हॉल, कमरे और रसोई तक शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी हर हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में दो से तीन दिन का समय लगाता था।