
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार किया है। सीएम मान ने कहा कि पंजाब में सरकार किसकी बनेगी, यह अमित शाह की इच्छा से नहीं, बल्कि राज्य के 3.25 करोड़ लोगों की मर्जी से तय होगा। उन्होंने कहा कि आज गुजरात नशीले पदार्थों की आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंजाब में नशे का बड़ा नेटवर्क फला-फूला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बड़े तस्करों ने उन वरिष्ठ मंत्रियों के नाम लिए थे, जिनके साथ अब समझौते की बातें की जा रही हैं।
सीएम मान ने कहा कि ड्रग्स गुजरात से आ रहे हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने 20,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स जब्त किए हैं। तो फिर वहां से ड्रग्स क्यों आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान सीमा से ड्रग्स आ रहे हैं, तो माना जा सकता है कि ड्रोन आ रहे हैं। लेकिन बंदरगाहों पर ड्रग्स कैसे पहुंच रहे हैं?
सीएम मान ने कहा कि बंदरगाहों पर उचित कस्टम प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था होती है। यदि 3,000 किलो की खेप बंदरगाहों पर पहुंच रही है, तो इसका मतलब है कि आज गुजरात सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।
भगवंत मान ने गुजरात से नशीले पदार्थों की बरामदगी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां से ड्रग्स पंजाब तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में 20 हजार करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ जब्त किए जाने की बात खुद स्वीकार की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि वहां से इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स कैसे पहुंच रहे हैं।
पंजाब विधानसभा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने निशाना साधा। मान ने कहा कि विपक्ष के पास कोई दूसरा मुद्दा नहीं है और वह केवल सदन में हंगामा करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले विधानसभा सत्र नहीं बुलाने की शिकायत करता है और जब सत्र बुलाया जाता है, तो उसका बहिष्कार कर देता है। सदन में इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है और विपक्ष को उसमें हिस्सा लेना चाहिए।
भगवंत मान ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल-जवाब और चर्चा बेहद जरूरी हैं। विपक्ष को सदन में अपनी बात रखनी चाहिए और सरकार के जवाब भी सुनने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हर सत्र में विरोध और बहिष्कार का रास्ता अपनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष न तो बहस में भाग लेना चाहता है और न ही जवाब सुनने को तैयार है, क्योंकि उसके पास सवालों के जवाब नहीं हैं।