
Bharat Bhushan Tiwari Encounter Update: बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस मामले में उनके पिता काशीनाथ तिवारी ने खुलकर न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि पूरी दुनिया ने देखा कि उनके बेटे के साथ क्या हुआ। परिवार का आरोप है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। वहीं पुलिस का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में यह घटना हुई। इसी विरोधाभास के बीच अब पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है।
भरत भूषण तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने बेटे की मौत को लेकर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि घटना को पूरी दुनिया ने देखा है। यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सब कुछ लोगों के सामने हुआ, तब न्याय मिलने में देरी क्यों हो रही है?
काशीनाथ तिवारी ने कहा कि प्रशासन और न्यायपालिका भी पूरे घटनाक्रम से परिचित हैं। इसके बावजूद परिवार अभी तक नतीजे का इंतजार कर रहा है। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि जांच के आदेश जरूर दिए गए हैं, लेकिन परिवार को अभी तक इस बात का भरोसा नहीं है कि सच सामने आएगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बता दें भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले थे। वह छात्र होने के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को लेकर भी सक्रिय रहते थे। खासकर बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर वह लगातार आवाज उठाते थे।
जानकारी के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था से नाराज भरत भूषण तिवारी ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो में वह हथियार के साथ दिखाई दिए थे और अधिकारियों को धमकी देते हुए नजर आए थे। इसके बाद पुलिस ने उनके घर को घेर लिया।
पुलिस का कहना है कि भरत मानसिक रूप से अस्थिर थे और उन्हें सुरक्षित पकड़कर इलाज के लिए भेजने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के दौरान भरत ने अवैध पिस्टल से कई राउंड फायरिंग की। इसके बाद एसटीएफ ने आत्मरक्षा में जवाबी गोली चलाई।
हालांकि, परिवार और स्थानीय लोगों की कहानी इससे अलग है। उनका दावा है कि गोली चलने से पहले भरत ने फेसबुक लाइव के दौरान अपनी पिस्टल पुलिस की ओर फेंक दी थी। उनका कहना है कि वह सरेंडर कर चुके थे और उस समय उनके पास कोई हथियार नहीं था। इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई।
इस घटना के बाद पूरे बिहार में विवाद बढ़ गया। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित थाना प्रभारी सहित चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।