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Gujarat News: 11 माह की बेटी को खोने का असहनीय दर्द, फिर भी माता-पिता ने देहदान कर पेश की मानवता की मिसाल

Bhavnagar Body Donation: गुजरात के भावनगर में 11 माह की बेटी यश्वी के निधन के बाद माता-पिता ने उसका देहदान किया। रेडक्रॉस सोसायटी ने इसे 1121वें देहदान के रूप में स्वीकार किया।
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Updated: 29 Oct 2026, 5:20 PM IST
Bhavnagar Body Donation
यश्वी। फाइल फोटो- पत्रिका

Indian Red Cross Society: गुजरात के भावनगर में 11 माह की बेटी यश्वी के निधन के बाद माता-पिता ने उसका देहदान कर मानव सेवा की मिसाल पेश की। दिल की बीमारी के चलते उपचार के दौरान यश्वी की मौत हो गई थी। इस दुख की घड़ी में परिवार ने बेटी का देहदान करने का फैसला लिया, ताकि उसका शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के काम आ सके। भावनगर की इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ने इस परिवार से 1121वां देहदान स्वीकार किया।

बेटी को खोने के दुख के बीच लिया फैसला

भावनगर निवासी जिनांगभाई शाह की 11 माह की बेटी यश्वी का दिल की बीमारी के चलते उपचार के दौरान निधन हो गया। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। छोटी उम्र में बेटी को खोने के दुख के बीच शाह परिवार ने देहदान का फैसला लिया। परिवार का यह कदम समाज में मानव सेवा और दूसरों के हित में काम करने की भावना का उदाहरण बना है। यश्वी के पिता जिनांगभाई शाह और परिवार के सदस्यों ने देहदान की इच्छा के संबंध में रेडक्रॉस सोसायटी, भावनगर से संपर्क किया।

इसके बाद सोसायटी के प्रतिनिधियों ने परिवार को देहदान की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि देहदान से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को शरीर की संरचना समझने और चिकित्सकीय अध्ययन में मदद मिलती है। इसके साथ ही चिकित्सा शोध में भी देहदान का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। परिवार की सहमति के बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार किए गए। प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेडक्रॉस सोसायटी ने यश्वी का देहदान स्वीकार कर लिया।

मौजूद लोगों की आंखें हुईं नम

यश्वी का देहदान स्वीकार किए जाने के दौरान परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की आंखें नम हो गईं। एक तरफ परिवार अपनी नन्ही बेटी को खोने के गम से गुजर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसके शरीर को चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए समर्पित करने का निर्णय भी लिया गया। इस मौके पर रेडक्रॉस सोसायटी के प्रतिनिधियों ने परिवार को सांत्वना दी और दिवंगत बच्ची की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। शाह परिवार का यह फैसला बताता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी समाज के हित में कदम उठाए जा सकते हैं। परिवार ने अपनी बेटी की याद को मानव सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया।

देहदान का संकल्प लिया

इस मामले की एक खास बात यह भी है कि शाह परिवार केवल देहदान तक सीमित नहीं है। परिवार के सदस्य नेत्रदान और अंगदान जैसे कार्यों के प्रति भी जागरूक हैं। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी देहदान का संकल्प लिया है। इससे समाज में अंगदान, नेत्रदान और देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश मिलता है। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ने नागरिकों से अपील की है कि वे रक्तदान, नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व को समझें तथा इन कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।

Updated on:
29 Oct 2026, 5:20 PM IST
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