Pen Gun Gang: 24 घातक पेन पिस्तौल और 78 मैगजीन बरामद। यह हथियार मेरठ के पास एक गुप्त फैक्ट्री से आ रहा है। तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की टीम ने 25-26 मार्च को मेरठ जिले में छापा मारा।
नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अवैध हथियार बनाने और तस्करी करने वाले एक खतरनाक गिरोह को जड़ से उखाड़ फेंका है। इस बड़ी कार्रवाई में पेन के आकार की घातक पिस्तौलें बनाने वाली पूरी फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। गिरोह न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि उत्तर भारत में हथियार सप्लाई करता था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र कुमार ने इस सफलता का खुलासा किया। 19 मार्च 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम ने बादली रेलवे स्टेशन के पास हथियार सप्लाई करने पहुंचे एक तस्कर को गिरफ्तार किया। उसकी तलाशी में पेन के आकार की एक नई पिस्तौल बरामद हुई, जो मेरठ से लाई गई थी।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र कुमार ने बताया कि गिरोह उत्तर भारत और दिल्ली में पेन पिस्तौल सप्लाई करता था। उन्होंने बताया कि एक साथी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) का सक्रिय सदस्य पहाड़ सिंह भी इस नेटवर्क से जुड़ा था, जिस पर पहले से 6-7 मामले दर्ज हैं। यह छापा सिर्फ हथियार बरामदगी नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर अवैध हथियारों की फैक्ट्री को नष्ट करने का मामला है। पेन गन जैसी चीजें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजधानी और आसपास के इलाकों में ऐसे गिरोहों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस सफलता पर दिल्ली पुलिस की तारीफ हो रही है।
पूछताछ में पता चला कि यह हथियार मेरठ के पास एक गुप्त फैक्ट्री से आ रहा है। तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की टीम ने 25-26 मार्च को मेरठ जिले में छापा मारा और मुख्य आरोपी परवेज फारूकी को गिरफ्तार कर लिया।गिरोह के दो अन्य सदस्य समीर और रेहान को उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और वे जेल में हैं।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी परवेज फारूकी के घर और फैक्ट्री से कुल 24 पेन पिस्तौलें, 78 मैगजीन, 3 बैरल, 3 स्लाइड, 3 बॉडी, स्प्रिंग्स और फायरिंग पिन समेत भारी मात्रा में हथियार बनाने का कच्चा माल और उपकरण बरामद किए गए।
ये पिस्तौलें 7.65 mm कैलिबर की सेमी-ऑटोमैटिक हैं, जो देखने में पूरी तरह पेन जैसी लगती हैं लेकिन बेहद खतरनाक हैं। इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है, इसलिए ये क्रिमिनल्स और आतंकियों के लिए बेहद पसंदीदा हथियार बन गए थे।