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AI बदल देगा क्राइम इन्वेस्टिगेशन का तरीका, राजस्थान पुलिस भी ले रही हर अपराधी के फिंगर प्रिंट 

Deep Contrastive Learning: यह खोज दिखाती है कि एआई पुरानी मान्यताओं को नई दिशा देगा। अपराधियों को पकडऩे में बड़ा बदलाव हो सकता है। जल्द ही दुनियाभर की पुलिस इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर सकती है।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Dec 30, 2025

मोहित शर्मा.

National Automated Fingerprint Identification System: जयपुर. फॉरेंसिक साइंस के इतिहास में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च में एआई ने साबित किया है कि एक ही व्यक्ति की अलग-अलग अंगुलियों के फिंगरप्रिंट्स में गहरी समानताएं होती हैं। इससे अब क्राइम इन्वेस्टिगेशन का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

पुलिस अलग-अलग अपराध स्थलों के निशानों को एक ही अपराधी से जोड़ सकेगी, जांच कई गुना तेज होगी और सालों पुराने कोल्ड केस सॉल्व हो सकेंगे। अपराधियों को पकड़ना आसान हो जाएगा। अब राजस्थान पुलिस भी हर अपराधी के फिंगर प्रिंट ले रही है। इसका पूरा डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। यदि कोई अपराधी देश छोड़कर भी भाग जाएगा तो दूसरी जगह क्राइम करने पर तुरंत पकड़ा जाएगा। पुलिस अपराधियों का डेटाबेस तैयार कर रही है। जल्द ही दुनियाभर की पुलिस इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर सकती है।

पहले जांच में ये दिक्कत थी ?

पहले माना जाता था कि एक व्यक्ति की दसों अंगुलियां और अंगूठा पूरी तरह अलग-अलग निशान देती हैं। इसलिए अगर एक क्राइम सीन पर अंगूठे का और दूसरे पर तर्जनी का निशान मिलता था, तो उन्हें एक ही व्यक्ति से जाेड़ना नामुमकिन था। पुलिस को लाखों-करोड़ों रिकॉर्ड्स चेक करने पड़ते थे, जिससे समय बर्बाद होता था और अपराधी बच निकलते थे।

अब बदलेगा खेल

जनवरी 2024 में 'साइंस एडवांस' जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में रिसर्चर गेब गुओ और प्रोफेसर होड लिप्सन की टीम ने एआई (deep contrastive learning) को 60,000 से ज्यादा फिंगरप्रिंट्स पर ट्रेन किया गया। एआई निशान के बीच वाले हिस्से (स्वर्ल्स और लकीरों की दिशा) की छिपी समानताओं को पकड़ लेता है और 75-90 प्रतिशत सटीकता से बता देता है कि दो अलग निशान एक ही व्यक्ति के हैं या नहीं।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह एक नया टूल है, जो पारंपरिक मिन्यूशिया (लकीरों के ब्रांचिंग पॉइंट्स) पर आधारित तरीके को सप्लीमेंट करेगा। अभी कोर्ट में डायरेक्ट सबूत के लिए नहीं, लेकिन लीड्स जनरेट करने और जांच तेज करने के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

मुख्य फायदे

अलग-अलग क्राइम सीन के निशानों को एक अपराधी से जोड़ा जा सकेगा।
जांच की स्पीड 10 गुना तक बढ़ जाएगी।
पुराने अनसुलझे केस (कोल्ड केस) दोबारा खुलेंगे।
संदिग्धों की लिस्ट बहुत छोटी हो जाएगी।

भविष्य में क्या होगा

पुलिस एजेंसियां AI टूल अपनाएंगी।
अपराधियों पर शिकंजा और कसा जाएगा।
कोर्ट में अभी सीधा सबूत नहीं, लेकिन जांच में क्रांतिकारी मदद।

बच नहीं सकेगा अपराधी

अपराधियों की सभी अंगुलियों के निशान लिए जा रहे हैं। सीसीटीएनएस और नेफिस से इस डेटा को जोड़ रहे हैं। अब कोई भी अपराधी बच नहीं सकेगा।

राजकुमार जैन, सीआई और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट

अपराध को रोकने में मिलेगी मदद

नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए हम सभी अपराधियों का डेटाबेस तैयार कर रहे हैं। भविष्य में अपराध को रोकने में इससे मदद मिलेगी। हमने करीब 80 प्रतिशत टारगेट अचीव कर लिया है।
जगदीश कुमार, डायरेक्टर,फिंगर प्रिंट ब्यूरो , राजस्थान


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