
सयानी घोष (Photo-X @sayani06)
साल 2015 की एक आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर जारी विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद सायोनी घोष (Sayani Ghosh Statement) ने एकबार फिर सफाई दी है। घोष ने कहा कि इस मामले में मैंने पहले ही सार्वजनिक रूप से सफाई दे दी थी। मेरा किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था।
मीडिया से बातचीत के दौरान सायोनी घोष (TMC MP Sayani Ghosh) ने कहा कि यह पोस्ट उन्होंने खुद नहीं किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था। सायोनी घोष ने कहा कि मैं हमेशा से यही कहती आई हूं कि वह पोस्ट मैंने नहीं किया था। 2021 में जब यह मामला दोबारा सामने आया, तब मैंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। कोई भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता। मैं खुद एक हिंदू हूं।
उन्होंने कहा कि साल 2015 में वह सिर्फ 22 साल की थीं और उस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' उनके लिए नया था। सायोनी घोष ने साफ किया कि न तो उन्होंने वह कार्टून बनाया था और न ही उसे पोस्ट किया था। सायोनी घोष ने कहा कि अगर किसी की जांच होनी चाहिए तो उस व्यक्ति की होनी चाहिए, जिसने वह कार्टून बनाया। जब 2021 में यह मामला मेरे संज्ञान में आया, तब मैंने तुरंत वह पोस्ट हटवा दिया था और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।
दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब एक पुराने पोस्ट को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी। इसको लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली थी और सायोनी घोष के खिलाफ पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं। इसके बाद उन्होंने बयान जारी कर कहा था कि यह पोस्ट उन्होंने नहीं किया था।
हालांकि यह विवाद लगातार उनके साथ जुड़ा रहा और उन्हें राजनीतिक व सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। सायोनी घोष ने आरोप लगाया कि अब इस पुराने विवाद का इस्तेमाल उन्हें राजनीतिक रूप से डराने और दबाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। वह संसद के भीतर और बाहर हमेशा सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रही हैं और शायद इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मेरे सीमित राजनीतिक अनुभव में मुझे लगता है कि भाजपा को विरोध की आवाज पसंद नहीं है। उन्हें लोकतंत्र में विपक्ष का अस्तित्व पसंद नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोग खुलेआम कह रहे हैं कि जो सायोनी घोष का सिर काटेगा, उसे एक करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। भाजपा नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से ऐसी बातें कर रहे हैं। दूसरी तरफ वही लोग महिला आरक्षण और महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं। क्या ये दोनों बातें साथ चल सकती हैं? बिल्कुल नहीं।"
उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं की आवाज उठाने को पसंद नहीं करती, जबकि बंगाल की संस्कृति हमेशा से महिलाओं को मजबूत और मुखर रहने की रही है।
Published on:
21 May 2026 07:00 am
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