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ममता बनर्जी की हार के बाद बिखरने लगी TMC! 80 में से सिर्फ 35 विधायक ही पहुंचे बैठक में

Mamata Banerjee: वरिष्ठ TMC विधायक और विपक्ष के नेता पद के प्रबल दावेदार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को सिरे से खारिज किया।

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Mamata Banerjee

ममता बनर्जी। (फोटो- AI)

Bengal Political Storm: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बिखराव के संकेत नजर आने लगे हैं। बुधवार को पार्टी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कुल 80 विधायकों में से महज 35 ही पहुंचे। बाकी 45 विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के अंदर संभावित दरारों को लेकर सियासी गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

TMC का सत्ता से विपक्ष में आने के बाद पहला आंदोलन

यह कार्यक्रम विधानसभा परिसर में डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा के पास आयोजित किया गया था। TMC विधायकों ने चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा, फेरीवालों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने के अभियान के विरोध में धरना दिया। मौजूद नेताओं में शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बनर्जी, कुणाल घोष और ऋतब्रत बनर्जी प्रमुख थे। यह TMC का सत्ता से विपक्ष में आने के बाद पहला आंदोलन था।

टीएमसी ने आतंरिक कलह की अटकलों को किया खारिज

वरिष्ठ TMC विधायक और विपक्ष के नेता पद के प्रबल दावेदार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कई विधायक चुनाव के बाद अपने क्षेत्रों में हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं के साथ व्यस्त हैं। कार्यक्रम एक दिन के नोटिस पर बुलाया गया था, इसलिए दूर-दराज के इलाकों के विधायकों के लिए पहुंचना मुश्किल था। लॉजिस्टिक दिक्कतें और संगठनात्मक जिम्मेदारियां गैरमौजूदगी की वजह बनीं।

एक दिन पहले हुई थी अहम बैठक

यह घटना मंगलवार को कालीघाट में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के ठीक एक दिन बाद हुई है। सूत्रों के मुताबिक उस बैठक में कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से सड़कों पर उतरकर जनता से जुड़ने की मांग की थी। बंद कमरों की बैठकों से खोया जनाधार वापस नहीं लौट सकता, यह राय कई नेताओं ने रखी।

टीएमसी को मिली सिर्फ 80 सीटें

TMC ने 15 साल सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में मात्र 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया। ममता बनर्जी खुद अपनी सीट भवानीपुर से हार गईं। हार के बाद पार्टी में आत्ममंथन चल रहा है। कुछ विधायकों ने नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

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