
Bihar Flood: बिहार की प्रमुख नदियों में पानी का स्तर बढ़ने से एक बार फिर चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद सोन, पुनपुन और गंगा नदियों में पानी का बहाव तेजी से बढ़ने के कारण कई जिलों में हालात गंभीर हो गए हैं। निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी तेजी से घुस रहा है, जिससे हजारों परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। इस संकट के बीच सीएम सम्राट ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया है और राहत व बचाव कार्यों के लिए निर्देश दिए हैं। वहीं, विपक्ष ने सरकार पर जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की पूरी तरह से कमी का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है।
आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ के कारण सोन, पुनपुन और गंगा नदियों में पानी का लगातार बहाव स्थिति को खतरनाक बना रहा है। पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले ग्रामीण इलाकों में पानी भर गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया ताकि हालात का व्यक्तिगत रूप से जायजा ले सकें। इसके तुरंत बाद, एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें आपदा प्रबंधन, कृषि, सड़क निर्माण, ग्रामीण कार्य और लोक निर्माण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
आपदा प्रबंधन मंत्री ने स्पष्ट किया कि बैठक में सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में सबसे अधिक नुकसान भागलपुर क्षेत्र में देखा गया है, जहां बांध का कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया गया और अब कटाव पूरी तरह रोक लिया गया है। मंत्री ने राहत की उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रशासनिक रिपोर्टों के मुताबिक रात भर में गंगा के जलस्तर में गिरावट आने की पूरी संभावना है, जिससे स्थिति जल्द ही सामान्य होने की ओर बढ़ेगी।
इधर, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर दियारा और बिदुपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। उन्होंने वहां की स्थिति को साझा करते हुए कहा कि दूर-दूर तक फैले हरे-भरे खेत अब पानी में विलीन हो चुके हैं और गंगा का जलस्तर बढ़ने से लोगों के घर जलमग्न हो रहे हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ग्राउंड पर सरकार का कोई राहत शिविर या आश्रय स्थल नजर नहीं आ रहा है। बाढ़ पीड़ितों के लिए न तो खाने-पीने का समुचित प्रबंध है और न ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है, जिसके चलते लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
जमीनी हालात का जायजा लेने के बाद तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सच्चाई से कोसों दूर बिहार सरकार ने पीड़ितों की सुरक्षा और बचाव के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में बाढ़ प्राकृतिक आपदा से ज्यादा सरकारी अनदेखी का परिणाम है, ताकि एनडीए के नेता भ्रष्टाचार के सैलाब में हाथ धो सकें। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब हर साल तटबंध निर्माण, कटाव निरोधी कार्यों और राहत शिविरों के नाम पर चार से पांच हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, तो फिर हर साल बांध कैसे टूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस बार-बार होने वाली समस्या का कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
वहीं, पटना साहिब से बीजेपी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने बाढ़ नियंत्रण के उपायों को लेकर पटना के जिला मजिस्ट्रेट और SDM के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हालांकि पटना के आस-पास के ग्रामीण इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है, फिर भी संभावित खतरों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि तटबंधों पर रिसाव या लीकेज के किसी भी संकेत पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि तुरंत मरम्मत का काम किया जा सके।
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति में उलझने का समय नहीं है। बल्कि, इस संकट के दौरान सभी को एकजुट होकर प्रभावित लोगों तक तुरंत मदद और राहत सामग्री पहुँचाने पर ध्यान देना चाहिए।