Samrat Choudhary, Bihar New CM: कामराज यूनिवर्सिटी और ‘हाफिडेविट’ बयान को लेकर क्यों उड़ा था मजाक? जानें बिहार के नए सीएम बनने जा रहे सम्राट चौधरी से जुड़े वो किस्से।
Bihar New CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी अब राज्य की सत्ता संभालने जा रहे हैं। एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। हालांकि, उनकी नई पारी शुरू होने से पहले उनका राजनीतिक सफर कई विवादों और चर्चाओं से घिरा रहा है।
यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान अक्टूबर 2025 में सामने आया, जब सम्राट चौधरी एक न्यूज कॉन्क्लेव में पहुंचे थे। इस दौरान उनसे प्रशांत किशोर के आरोपों पर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने अपनी शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने “कामराज विश्वविद्यालय” से पीएफसी (PFC) कोर्स किया है और इसकी जानकारी उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को संदेह हो, तो वह सीधे विश्वविद्यालय से इसकी पुष्टि कर सकता है। यहां जिस संस्थान की बात हो रही थी, उसे मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से जोड़ा गया। हालांकि, इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और लोग इस कोर्स की वैधता और डिटेल्स तलाशने लगे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर सवाल खड़े किए।
सम्राट चौधरी एक और विवाद में तब आए जब प्रशांत किशोर ने उनके चुनावी हलफनामों और कथित ‘कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी’ की डॉक्टरेट डिग्री को लेकर सवाल उठाए। इस पर जवाब देते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, “जाकर मेरा हाफिडेविट (Affidavit) देख लें।”
उनके इस बयान के दो पहलू सामने आए। एक तरफ उन्होंने अपनी डिग्री का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी नहीं छुपाया है और सारी जानकारी चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में मौजूद है। दूसरी तरफ उन्होंने प्रशांत किशोर पर पलटवार करते हुए तंज कसा कि वे रोज सुबह उठकर उनके पुराने ‘हाफिडेविट’ पढ़ते हैं क्योंकि उनके पास कोई और काम नहीं है।
हालांकि, ‘एफिडेविट’ को ‘हाफिडेविट’ बोलने को लेकर सोशल मीडिया पर उनका खूब मजाक उड़ा और यह बयान लंबे समय तक चर्चा में बना रहा।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की, फिर जनता दल (यूनाइटेड) में गए और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। बार-बार पार्टी बदलने को लेकर विपक्ष उन्हें अक्सर निशाने पर लेता रहा है और इसे अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बताता है।
सम्राट चौधरी अपने आक्रामक अंदाज और सीधे बयानों के लिए जाने जाते हैं। कई मौकों पर उनके बयान राजनीतिक विवाद का कारण बने हैं, खासकर जब उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तीखे हमले किए। इससे जहां उनके समर्थकों में उत्साह दिखता है, वहीं विरोधियों को उन्हें घेरने का मौका भी मिलता है।
अब जब सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि को एक जिम्मेदार और संतुलित प्रशासक के रूप में स्थापित करने की होगी।
अब तक के विवाद उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर उनसे ज्यादा परिपक्वता और गंभीरता की उम्मीद की जाएगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इन विवादों से ऊपर उठकर विकास और सुशासन की नई कहानी लिख पाते हैं या नहीं।