
UBT MPs Rebellion: महाराष्ट्र में शिव सेना उद्धव ठाकरे और शिव सेना एकनाथ शिंदे गुट की खींचतान से भाजपा ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। इन दिनों इस पार्टी के सांसदों के आने जाने का मामला गर्माया हुआ है। गौरतलब है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 5 सांसद मुंबई में बाल ठाकरे के यादगार मातोश्री पर उद्धव ठाकरे की बुलाई गई एकता बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे सियासी संकट गहरा गया है। प्रदेश के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने एक पोस्ट में कहा, 'उद्धव ठाकरे के सांसदों के आने-जाने से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। उद्धव ठाकरे को खुद पता होना चाहिए कि उनके सांसद या विधायक उनका साथ क्यों छोड़ रहे हैं। अगर वे एकनाथ शिंदे के साथ जा रहे हैं, तो इसका हमारे किसी नेता से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, भाजपा को इसमें क्यों घसीटा जा रहा है?" उन्होंने संजय राउत के लगाए गए गए आरोपों पर कहा, 'मुझे लगता है कि सांसदों और विधायकों पर ऐसे आरोप नहीं लगने चाहिए। यह आरोप लगाना सही नहीं है कि कोई सांसद या विधायक पैसे के लिए अपना रुख बदल लेता है। किसी विधायक या सांसद के दल बदलने की वजह की जांच होनी चाहिए। भाजपा का इससे कोई संबंध नहीं है।
इस मामले में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है,शिवसेना उद्धव ठाकरे सदन में अपने विधिवत अधिकृत नेता और सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाली एक एकल राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त है, और पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी गुट या पृथक समूह को कोई दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा प्रदान नहीं की जानी चाहिए; यदि ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त होता है, तो शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे को आपके कार्यालय के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना उस पर कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, पार्टी कानून में उपलब्ध अपने सभी अधिकारों को सुरक्षित रखती है, जिसमें दसवीं अनुसूची के प्रावधान लागू करने और ऊपर उल्लिखित संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत किसी भी आचरण के संबंध में आवश्यक उपाय करने का अधिकार शामिल है।'
शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 5 सांसद मुंबई में बाल ठाकरे के यादगार मातोश्री पर उद्धव ठाकरे की बुलाई गई एकता बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे सियासी संकट गहरा गया। इस गुट के केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल हुए, जबकि बाकी पांच वर्चुअल या फोन के माध्यम से जुड़ गए। बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों का विवरण इस प्रकार है:
व्यक्तिगत रूप से शामिल होने वालेसांसद: अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल। अनुपस्थित/वर्चुअल रूप से शामिल होने वालेसांसद: ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए जुड़े, जबकि संजय जाधव ने फोन पर बात की।
यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख (जो मातोश्री की बैठक में शामिल नहीं हुए थे) को दिल्ली में प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलते हुए देखे जाने के बाद पार्टी में फूट की अटकलें जिसे 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया है-तेज हो गईं। देशमुख और शिंदे गुट, दोनों के नेताओं ने चुनाव क्षेत्रों को लेकर चल रही नाराजगी और एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ने की संभावना की ओर इशारा किया है।
उद्धव ठाकरे ने 2022 जैसी फूट के डर के मददेनजर एक अल्टीमेटम जारी कर अनुपस्थित सांसदों से अपनी वफादारी साबित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से मातोश्री में पेश होने के लिए कहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए आजाद हैं।
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने बड़ी संख्या में पार्टी छोड़ने की अफवाहों को बेबुनियाद व निराधार बताते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि 'ऑपरेशन टाइगर' की कहानी विपक्ष की एक चाल है और उन्होंने जोर देकर कहा है कि सभी सांसद मजबूती से पार्टी के साथ बने हुए हैं।