
BJP Punjab Election Strategy: भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब को अपने चुनावी राज्यों में सबसे आगे रख रही है। पार्टी ड्रग्स, आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और धर्मांतरण के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। भाजपा का मानना है कि पंजाब में नशे का कारोबार गंभीर चुनौती बन चुका है और इसके सामाजिक व आर्थिक दुष्प्रभाव युवाओं पर साफ दिखाई दे रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य की आर्थिक स्थिति, कथित नीतिगत विफलताएं और बढ़ती बेरोजगारी ने हालात को और जटिल बनाया है। भाजपा यह भी मानती है कि धर्मांतरण की बढ़ती गतिविधियां राज्य के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही हैं, जो चिंता का विषय है। पश्चिम बंगाल में भय और घुसपैठ के मुद्दे उठाने के बाद भाजपा पंजाब में इन नए मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएगी। पार्टी ने राज्य की सामाजिक और जातीय संरचना को ध्यान में रखते हुए अपनी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है।
भाजपा फिलहाल पंजाब में किसी दल के साथ गठबंधन के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर अभी कोई चर्चा नहीं है। कृषि कानूनों के विवाद के बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस महीने पंजाब दौरे की संभावना है, जहां वह नशे के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर चुनावी अभियान को गति दे सकते हैं।
पंजाब में भाजपा के राजनीतिक समीकरणों में केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। इसी के चलते भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया है। उनका राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। यह भी अटकलें है कि वे 21 जून से पहले इस्तीफा दे सकते हैं। उन्हें पंजाब में पार्टी की तरफ से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह भी संभव है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव लड़े। हालांकि प्रदेश में पार्टी में अंदरुनी असंतोष की खबरें भी सामने आई थी। इसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।