
West Bengal TMC Political Crisis (सोर्स- एक्स)
West Bengal TMC Political Crisis: बंगाल की राजनीति में पिछले कई दिनों से उबाल देखने को मिल रहा है। टीएमसी के कई सांसदों ने बागी तेवर दिखा दिए हैं। ममता बनर्जी के साथ बगावत करने के बाद अब सभी की ही नजरें टिकी हैं आने वाले भविष्य पर, जहां सायोनी समेत कई सासंद बड़ा फैसला से सकते हैं। इसी बीच सायोनी दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची हैं, जहां वो विरोधी पार्टी के बड़े नेताओं के साथ मुलाकात कर सकती हैं। इस मौके पर सायोनी ने क्या कुछ कहा, चलिए जानते हैं।
ANI द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि सायोनी को दिल्ली एयरपोर्ट पर देखते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस दौरान उनसे जब सवाल किया गया कि वो क्या कदम उठाने वाली हैं तो उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं बोलना चाहती हूं। आपको पता चल जाएगा खुद ही कि क्या होने वाला है।
टीएमसी के संगठन में हुए ताजा फेरबदल में जादवपुर से सांसद सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाकर युवा नेता अर्नब बनर्जी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं महिला तृणमूल कांग्रेस की कमान अब सांसद माला रॉय के हाथों से निकलकर विधायक अलीफा अहमद के पास पहुंच गई है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही समय पहले पार्टी पुनर्गठन के दौरान दोनों नेताओं को दोबारा इन पदों पर नियुक्त किया गया था। लेकिन अचानक हुए इस फैसले ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी नेतृत्व अब किसी भी तरह की असहमति या बगावत को लेकर बेहद सतर्क हो चुका है।
क्या टीएमसी में टूट की आहट है?
पार्टी के भीतर असंतुष्ट सांसदों का एक समूह लगातार सक्रिय बताया जा रहा है। बागी खेमे का दावा है कि लोकसभा में टीएमसी के अधिकांश सांसद उनके साथ हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सायोनी घोष और माला रॉय के नाम भी इस गुट से जोड़े जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि असंतुष्ट सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ नेताओं ने तो यह तक संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे संसद में अलग राजनीतिक रुख भी अपना सकते हैं।
5 जून को ममता बनर्जी ने पार्टी की लगभग सभी पुरानी समितियों और प्रकोष्ठों को भंग कर संगठन का व्यापक पुनर्गठन किया था। नए ढांचे में उन्होंने अपने भरोसेमंद नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि वरिष्ठ नेताओं को संगठन और संसदीय मामलों में अहम भूमिका दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी अब संगठन को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखने और संभावित बगावत को रोकने के लिए सख्त फैसले ले रही हैं।
Published on:
14 Jun 2026 01:59 pm
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