
महेश भट्ट ने सुनाया 'सारांश' की कहानी को लेकर किस्सा। (फोटो सोर्स: IMDb)
Mahesh Bhatt on Saaransh: साल 1984 में एक्टर अनुपम खेर और फिल्ममेकर महेश भट्ट फिल्म 'सारांश' के लिए साथ आए थे। महेश भट्ट ने चार दशक से भी ज्यादा समय पहले इस कल्ट क्लासिक के लिए अपनी निजी जिंदगी मिले कुछ दुखद अनुभवों का इस्तेमाल किया। 42 साल पहले आई ये फिल्म एक ऐसे बुज़ुर्ग जोड़े की कहानी है जो अपने इकलौते बेटे को खोने के गम से जूझ रहे हैं। एक हालिया इंटरव्यू में, फिल्ममेकर ने बताया कि यह कहानी उनके मेंटर यू.जी. कृष्णमूर्ति के बेटे की मौत से प्रेरित थी, एक ऐसी घटना जिसे उन्होंने खुद देखा था। उन्होंने यह भी बताया कि 'सारांश' पहली ऐसी फिल्म थी जिसे राजश्री प्रोडक्शन्स ने बिना स्क्रिप्ट पढ़े ही मंज़ूरी दे दी थी।
'द रश्मि विराग शो' पर बातचीत के दौरान, महेश भट्ट ने कहा, "मैं 34 साल का था और अनुपम खेर 28 साल के थे। यह एक जुनून, एक पागलपन जैसा था। मेरी हालत ऐसी थी कि कोई मुझसे पैसे लेकर मुझसे यह फिल्म बनवा सकता था। मैं एक ऐसे अनुभव से गुजरा था।"
महेश भट्ट ने एक करीबी की मौत को देखने के बारे में बात करते हुए कहा, "यू.जी. कृष्णमूर्ति के जवान बेटे की अचानक मौत हो गई थी। वह एक कॉपीराइटर थे जिन्होंने लिखा था, 'हैप्पी डेज आर हियर अगेन'। विडंबना यह है कि उन्हें सारकोमा कैंसर हो गया, जो बहुत तेजी से फैलने वाला कैंसर था। दो महीने बाद उनकी मौत हो गई। मैंने एक नौजवान की मौत को बहुत करीब से देखा था।"
इसके आगे उन्होंने बताया, "यू.जी. ने उस मौत को जिंदगी की एक घटना के तौर पर लिया। उन्होंने इसे जिंदगी से अलग एक घटना या वाकये के तौर पर देखा। ये जीने का एक तरीका है, मौत जीने का ही एक हिस्सा है। वह अनुभव मेरी रग-रग में बस गया था और बाहर आने के लिए बेचैन था।"
महेश भट्ट ने आगे बताया, 'मुझे ठीक से नहीं पता कि याद विचार कहां से आया, लेकिन ये उसी दौर में आया। बचपन में, मैं हमेशा मौत के विषय को लेकर बहुत सोचता था। मैं शिवाजी पार्क के श्मशान घाट में घंटों बिताता था।” इसके आगे उन्होंने कहा, “मैं लोगों को अपने अपनों की चिता जलाते हुए देखता था। मुझे महसूस हुआ कि व्यक्ति चला जाता है, राख वहीं रह जाती है, और फिर परिवार चला जाता है। ये एक ऐसा विषय था जो हमेशा मेरे दिमाग में रहता था। और अचानक, ये 'सारांश' में सामने आया। अगर आप जीवन के बारे में बात करते हैं, तो आपको मौत के बारे में भी बात करनी होगी।”
जब महेश भट्ट ने बड़जात्या परिवार के सामने इस बारे में नबात की, तो उन्होंने बिना किसी स्क्रिप्ट के ही इसके लिए हामी भर दी। “यह एक ऐसी फिल्म है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है। अनुपम खेर जैसे अभिनेता, जिन्होंने 550 से ज्यादा फिल्में की हैं, ने कहा कि उनके पूरे काम की पहचान एक ही फिल्म से होती है। मैंने बड़जात्या परिवार को कहानी सुनाई, और उनके प्रोडक्शन हाउस में पहली बार ऐसा हुआ कि उन्होंने बिना स्क्रिप्ट के फिल्म बनाने का फैसला किया। मुझे हर सीन अच्छी तरह याद था। लेकिन, मैं इसे डायनामिक रखता था; मैं हर दिन इसमें कुछ नया जोड़ने का इंतजार करता था।”
Updated on:
03 Aug 2026 09:10 pm
Published on:
03 Aug 2026 07:18 pm
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