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युमनाम के दवाब से बीरेन सिंह ने दिया था इस्तीफा! अब BJP बनाने जा रही सीएम; किन चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना

New CM Face Manipur: खेमचंद सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2002 में बीरेन सिंह के साथ ही डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी (DRPP) से की थी।

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Feb 04, 2026
युमनाम खेमचंद सिंह को सीएम चेहरा किया घोषित (Photo-IANS)

Manipur Politics: मणिपुर की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिलते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने युमनाम खेमचंद सिंह को राज्य का नया मुख्यमंत्री चेहरा चुना है। 62 वर्षीय खेमचंद सिंह वर्तमान में मणिपुर विधानसभा के सदस्य हैं और यह उनका दूसरा कार्यकाल है। वह उन प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व के खिलाफ पार्टी के भीतर असहमति की अगुवाई की थी। साथ ही, वह हाल के वर्षों में एकमात्र मैतेई विधायक रहे, जिन्होंने पहल करते हुए कूकी-जो समुदाय के राहत शिविर का दौरा किया था, जिसे राज्य की राजनीति में एक प्रतीकात्मक कदम के तौर पर देखा गया।

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2002 में की थी राजनीतिक जीवन की शुरुआत

खेमचंद सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2002 में बीरेन सिंह के साथ ही डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी (DRPP) से की थी। यह पार्टी उस समय बनी थी, जब केंद्र सरकार द्वारा 1997 के संघर्षविराम को NSCN(IM) उग्रवादी संगठन के साथ “बिना किसी क्षेत्रीय सीमा” के विस्तार दिए जाने के खिलाफ मणिपुर में व्यापक आंदोलन हुआ था। इस फैसले को राज्य की “भौगोलिक अखंडता” के लिए खतरा माना गया था। बीरेन सिंह उस पार्टी से विधायक बने और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए, जबकि खेमचंद सिंह ने राजनीति में सक्रिय भूमिका कुछ वर्षों बाद निभानी शुरू की।

2013 में जॉइन की थी बीजेपी

खेमचंद सिंह एक वरिष्ठ ताइक्वांडो खिलाड़ी और शिक्षक भी हैं। हाल ही में उन्हें 5th डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 2013 में भाजपा जॉइन की और 2017 में सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। इसी के साथ वह मणिपुर में बनी पहली भाजपा सरकार का हिस्सा बने। पहले बीरेन सिंह सरकार में, जहां अधिकांश विधायक नए थे, खेमचंद सिंह विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) बने। 2022 में बनी दूसरी भाजपा सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

युमनाम के दबाव में बीरेन ने दिया था इस्तीफा

राज्य में जातीय हिंसा और संघर्ष के दौरान सरकार की नाकामी को लेकर जनता का गुस्सा लगातार सामने आता रहा। अक्टूबर 2023 में इम्फाल स्थित खेमचंद सिंह के घर पर ग्रेनेड हमला भी हुआ था। इसके बावजूद, 2024 से पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। कई भाजपा विधायक दिल्ली तक पहुंचे और केंद्रीय नेतृत्व से मुख्यमंत्री बदलने की मांग की। खेमचंद सिंह इन असंतुष्ट नेताओं में प्रमुख थे। उन्होंने और विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रत सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाया, जिसके बाद अंततः बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद कुछ समय के लिए खेमचंद सिंह का नाम मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में उभरा, लेकिन इसके बजाय फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद भी उन्होंने राज्य में लोकप्रिय सरकार की बहाली की लगातार पैरवी की।

RSS के भरोसेमंद नेता हैं खेमचंद सिंह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खेमचंद सिंह को RSS का भरोसेमंद नेता माना जाता है और उन्हें कूकी-जो और नगा समुदायों में भी अपेक्षाकृत स्वीकार्य चेहरा समझा जाता है। एक स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षक के अनुसार, “उन्हें एक उदार मैतेई नेता के रूप में देखा जाता है, जो मौजूदा हालात में भाजपा के लिए संतुलन बनाने वाला चेहरा साबित हो सकते हैं।”

किन चुनौतियों को करना पड़ेगा सामना

नई सरकार के सामने कठिन चुनौतियाँ होंगी। मणिपुर आज भी सामाजिक विभाजन, विस्थापन, सीमित आवाजाही, अधूरा निरस्त्रीकरण और गहरे घावों से जूझ रहा है। एक साल में चुनाव हैं, इसलिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का भरोसा लौटाना होगा। इसके लिए पुनर्वास, रास्तों की बहाली, समुदायों के बीच संवाद और सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। सरकार की सफलता सत्ता से नहीं, बल्कि आम लोगों में विश्वास की वापसी से आंकी जाएगी।

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Published on:
04 Feb 2026 08:52 am
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