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लोहिया की विरासत पर जंग, सपा को मात देने के लिए बीजेपी की ‘ढाई चाल’

Uttar Pradesh Election: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को मात देने के लिए बीजेपी ने नई रणनीति तैयार कर ली है। क्या है बीजेपी का प्लान? आइए नज़र डालते हैं आनंद मणि त्रिपाठी की रिपोर्ट पर।
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Jul 04, 2026
Yogi and Akhilesh
योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव (File Photo)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)  में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी (BJP) पूरी तरह से तैयारी में जुटी है। हालांकि चुनाव की औपचारिक रणभेरी भले ही अभी नहीं बजी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राजनीतिक दृष्टि से अहम देश के इस सबसे बड़े प्रदेश की सियासत इन दिनों 'बड़े लोहिया' डॉ. राम मनोहर लोहिया और 'छोटे लोहिया' के नाम से प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र की विरासत के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आ रही है।

ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने के लिए सपा की रणनीति

समाजवादी पार्टी - सपा ने 'छोटे लोहिया' की जयंती के अवसर पर 5 अगस्त को ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है। इसे ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मणों को बीजेपी का पारंपरिक और प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है।

सपा को मात देने के लिए क्या है बीजेपी की रणनीति?

दूसरी तरफ बीजेपी भी अपने इस वोट बैंक में संभावित सेंध को रोकने और समाजवादी विचारधारा से जुड़े वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने हाल ही में प्रख्यात समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के आवास पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की है। राजनीतिक शतरंज में इसे बीजेपी की 'ढाई चाल' के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नए परिसर के उद्घाटन से पहले पूजा-अर्चना की।

लोहिया को बनाएंगे 'अपना'

राजनीतिक गलियारों में बीजेपी के लोहिया प्रेम को उस सामाजिक और वैचारिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जिसके तहत बीजेपी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अन्य सेनानियों को आत्मसात किया। अगर डॉ.लोहिया को भी बीजेपी आत्मसात करने में सफल रहती है तो सपा की सियासत का वैचारिक सिक्का कमजोर पड़ेगा।

सड़क से सोशल मीडिया तक की राजनीति में कहाँ है सपा?

राजनीतिक विश्लेषक सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के विधानसभा चुनाव 2012 को याद करते हुए कहते हैं कि जिस तरह से उन्होंने सड़क पर साइकिल चलाई थी, उसके बाद वो साइकिल कहीं खो सी गई है। अब साइकिल सड़क पर कम सोशल मीडिया पर ज़्यादा नज़र आ रही है। सपा सोशल मीडिया पर मज़बूत दिखाई दे रही है।

बंटे विपक्ष से बीजेपी को राहत

उत्तर प्रदेश की पूरी राजनीति में बीजेपी कुल ढाई पाटिर्यों से चुनाव लड़ रही है। सबसे खास बात यह है कि विपक्ष पूरी तरह से बंटा हुआ है। विपक्ष में सबसे मज़बूत पार्टी सपा एक नंबर पर है। दो नंबर पर दो पार्टियाँ बसपा और कांग्रेस हैं और आधी पार्टी में बाकी अन्य पार्टियाँ आ जाती हैं। सपा के मुस्लिम वोट में सेंध के लिए एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी एक्टिव हो गए हैं।

Updated on:
04 Jul 2026 04:13 am
Published on:
04 Jul 2026 04:11 am