
Raju Kumar Singh: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में जश्न के दौरान हुई फायरिंग में महिला की मौत के मामले में बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस मनोज जैन ने 29 सितंबर को उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहली नजर में निचली अदालत के फैसले में ऐसी स्पष्ट गलती या गंभीर खामी नहीं दिखती, जिसके आधार पर दोषसिद्धि पर रोक लगाई जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट पहले ही 27 जुलाई 2026 को उनकी चार साल की सजा पर रोक लगा चुका है। सिंह ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील भी दायर की है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि मामले की सतही जांच से ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई ऐसी स्पष्ट मनमानी या प्रत्यक्ष गलती नजर नहीं आती, जो दोषसिद्धि पर रोक लगाने का आधार बन सके। अदालत ने यह भी कहा कि सिंह के पिछले रिकॉर्ड को पूरी तरह साफ नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, उनके खिलाफ कई मामले दर्ज रहे हैं, हालांकि उनमें से कई मामलों में उन्हें बरी किया जा चुका है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि घटना में शराब के प्रभाव में हथियार का इस्तेमाल और जश्न के दौरान फायरिंग शामिल थी, जबकि इसके संभावित परिणामों की जानकारी होने की बात अदालत ने अपने आदेश में कही।
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में एक फार्महाउस पर आयोजित न्यू ईयर पार्टी का है। पार्टी के दौरान हुई जश्न की फायरिंग में अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2026 में राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल की साधारण जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सिंह को जून 2026 में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था। धारा 304 पार्ट-2 ऐसे गैर इरादतन हत्या के मामले से जुड़ी है, जिसमें आरोपी को अपने कृत्य से मौत होने की जानकारी होने की स्थिति मानी जाती है।