
Maharashtra SIR: बॉम्बे हाई कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पनुरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिका पर हाई कोर्ट 1 दिसंबर को सुनवाई करेगा। इस मामले में चुनाव आयोग (ECI) ने हाई कोर्ट से आग्रह किया है कि वह ये सुनवाई टाल दे। इसके लिए चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय (SC) के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट्स इस मामले पर सुनवाई न करें। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही एसआईआर की वैधता से जुड़ी रिट याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। इसके उलट बॉम्बे हाई कोर्ट ने 1 दिसंबर को सुनवाई करने का फैसला लिया है।
इस याचिका में महाराष्ट्र में यह आशंका जताई गई है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण महाराष्ट्र की मतदाता सूची से लगभग 2.1 करोड़ नाम बाहर हो सकते हैं। इसके साथ ही एसआईआर लागू करने के फैसले का ब्योरा मांगा गया है, जिसमें इसके पीछे के दर्ज कारण, अपनाई गई कार्यप्रणाली और इसका कानूनी आधार शामिल है।
याचिका में ऐसे सुरक्षा उपायों की भी मांग की गई है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पात्र मतदाता सूची से बाहर न हों और जिन लोगों के नाम गलती या अनजाने में हटा दिए गए हैं, उन्हें वापस जोड़ा जाए।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम काटे गए थे, उनको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल है। इसमें याचिकाकर्ता ने मामले की सुनवाई होने तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने पर रोक लगाने की भी अपील की गई। साथ ही आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की गई है। इस पर कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ाने की मांग पर तत्काल राहत नहीं दी।
अरुण आनंदगिरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि SIR के तहत महाराष्ट्र में करीब 33 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें फॉर्म-6 भरने के लिए कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है।