शशि थरूर ने Union Budget 2026–27 को अस्पष्ट और राज्यों के प्रति उदासीन बताया। मिडिल क्लास, वित्तीय विकेंद्रीकरण और केरल से जुड़ी अपेक्षाएं इस बजट में पूरी नहीं हो सकीं।
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए Union Budget 2026–27 पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। बजट को लेकर जहां सरकार उपलब्धियों का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे दिशाहीन बता रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी मीडिया बातचीत के दौरान बजट को लेकर गहरी निराशा जताई और कहा कि इसमें न तो मिडिल क्लास के लिए कुछ है और न ही राज्यों की वास्तविक जरूरतों को समझा गया।
शशि थरूर के अनुसार Union Budget 2026–27 में मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लिए कोई ठोस राहत नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि भाषण भले ही छोटे-छोटे सबहेडिंग में बंटा था, लेकिन वास्तविक नीतिगत फैसलों की कमी साफ दिखी। महंगाई, रोजगार और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहे वर्गों के लिए बजट में कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया, जिससे आम नागरिकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
वित्तीय विकेंद्रीकरण को लेकर भी थरूर ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्यों को मिलने वाला हिस्सा अब भी 41 प्रतिशत पर ही अटका हुआ है। कांग्रेस नेता के मुताबिक कई राज्यों के पास अपने नागरिकों और मतदाताओं के प्रति जिम्मेदारियां निभाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे गंभीर समस्या बनती जा रही है, क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है।
केरल का उदाहरण देते हुए शशि थरूर ने कहा कि राज्य पिछले लगभग 15 वर्षों से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मांग कर रहा है, लेकिन इस बजट में भी कोई घोषणा नहीं हुई। आयुर्वेद के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की बात जरूर कही गई, लेकिन स्थान को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी गई। थरूर का कहना है कि आयुर्वेद का प्रमुख केंद्र होने के नाते केरल इसके लिए स्वाभाविक विकल्प है, फिर भी कोई वादा नहीं किया गया। केरल का उल्लेख केवल रेयर अर्थ और टर्टल ट्रेल तक सीमित रहा, जबकि नारियल, काजू और मत्स्य पालन जैसे अहम विषयों में भी राज्य का नाम नहीं आया।